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Archive for January, 2017


This client consulted me for Numerology and after following recommendation achieved amazing results.

Another client achieved most wanted promotion and rise within 2 months period.

Client came with marriage issue…not able to find right partner, everything goes fine but in the end things dont workout, so far met 18 girls but no luck. Conaulted me..advised him perfect day, date, time and cloths to wear when he goes to meet. Guess what, on very 1st meeting he found right partner and getting married on 19th Jan 2017.

Check out the video testimony of one of the client. As well as messages shared by Vastu clients.

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*सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए है ।*

मुनि स्नान ।

जो सुबह 4 से 5 के बिच किया जाता है ।
मुनि स्नान सर्वोत्तम है ।

देव स्नान ।

जो सुबह 5 से 6 के बिच किया जाता है ।
देव स्नान उत्तम है ।

मानव स्नान  ।

जो सुबह 6 से 8 क बिच किया जाता है ।
मानव स्नान समान्य है ।

राक्षसी स्नान  ।

जो सुबह 8 के बाद किया जाता है  । 
राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है ।
किसी भी मानवी को 8 बजे के बाद स्नान नही करना चाहिए।
मुनि स्नान …….
 घर में सुख , शांति , समृद्धि, विध्या , बल , आरोग्य , चेतना , प्रदान करता है ।
देव स्नान ……
आप के जीवन में यश , किर्ती , धन वैभव, सुख , शान्ति, संतोष , प्रदान करता है ।
मानव स्नान…..  
काम में सफलता , भाग्य ,अच्छे कर्मो की सूझ ,परिवार में एकता , मंगल मय , प्रदान करता है ।
राक्षसी स्नान….. 
दरिद्रता , हानि , कलेश , धन हानि , परेशानी, प्रदान करता है ।
किसी भी मनुष्य  को  8  के बाद स्नान नही करना  चाहिए।
पुराने जमाने में इसी लिए सभी सूरज निकलने से पहले स्नान  करते थे ।
खास कर जो घर की स्त्री होती थी ।
चाहे वो स्त्री  माँ के रूप में हो, पत्नी के रूप में हो, बेहन के रूप में हो ।
घर के बडे बुजुर्ग यही समझाते सूरज के निकलने से पहले ही स्नान हो जाना चाहिए ।
ऐसा करने से धन , वैभव लक्ष्मी , आप के घर में सदैव वास करती है ।
उस समय……  एक मात्र व्यक्ति की कमाई से पूरा हरा भरा पारिवार  पल जाता था , और आज मात्र पारिवार में चार सदस्य भी कमाते है तो भी पूरा नही होता ।
उस की वजह हम खुद ही है । पुराने नियमो को तोड़ कर अपनी सुख सुविधा के लिए नए नियम बनाए है ।
प्रकृति ……का नियम है, जो भी उस के नियमो का पालन नही करता , उस का दुष्टपरिणाम सब को मिलता है ।
अपने जीवन में कुछ नियमो को अपनाये ओर उन का पालन भी करे ।

Unfortunately, due to tine constraint I been unable to post case study/testimony so far.

Well as they say its never to late to start something new….

This client contacted me for help with list of problems and work was carried out in step by step to ensure each problems are resolved successfully.

Here is the testimony along with problem areas, remedies suggested. Consultation was provided based on Mahavastu and Numerology.

client-testimony-jm-jan-2017

I will be posting more very soon.

Comments are most welcome.If you like my posts then why not follow us and subscribe to get update straight into your email box.

Here is the basic 9 directions, associated color, its main attributes along with creative, exhaustive and destructive cycles. Use this principle to check basic Vastu of house, office, factory etc… if one notices mis-match of color/objects, activities etc… then check symptoms (example business not doing well, relationship issue, no new opportunities or staff unrest etc…) and treat them to come out of crisis.
Pls note: This is basic checks and may not result into exact desire results.

There are more colours of same family associated with each directions… for example Black, Aqua etc… are also associated with North directions. Continue reading

This article is written by my astro colleague and sharing as its written. This is in Hindi, as time permits I will add english version.

Check out my design…for costing and how best to use with Mantra to chant please drop me an email.

🔯शास्त्रों का कथन है कि श्रीयंत्र के दर्शन मात्र से ही इसकी अद्भुत शक्तियों का लाभ मिलना शुरू हो जाता है।

✡श्री यंत्र का उपयोग (How to Use Shree Yantra)

श्री यंत्र की पूजा के लिए लक्ष्मी जी के बीज मंत्र “ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं महालक्ष्मै नम:” का प्रयोग करें।

🙏🏻श्री यंत्र की आराध्या देवी श्री त्रिपुरा सुन्दरी देवी मानी जाती हैं। पौष मास की सक्रांति के दिन और वह भी रविवार को बना हुआ श्री यंत्र बेहद अद्भुत व सर्वोच्च फल देने वाला होता है, लेकिन ऐसा ना होने पर आप किसी भी माह की संक्रांति के दिन या शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन इस यंत्र का निर्माण कर सकते हैं। यह यंत्र ताम्रपत्र (तांबे की प्लेट), रजत-पत्र या स्वर्ण-पत्र पर ही बना होना चाहिए।

🔯श्रीयंत्र के प्रभाव के बारे मे एक और पौराणिक कथा है। माना जाता है कि एक बार लक्ष्मीजी पृथ्वी से दुखी होकर बैंकुठ चली गई। फलस्वरूप पृथ्वी पर अनेक समस्याएं पैदा हो गईं। तब महर्षि वशिष्ठ ने विष्णु की सहायता से लक्ष्मी को मानने के प्रयास किए, लेकिन विफल रहे। फिर वे देवगुरु बृहस्पति के मनाने पर तुरंत पृथ्वी पर लौट आईं और कहा श्रीयंत्र ही मेरा आधार है और इसमें मेरी आत्मा निवास करती है। इसलिए मुझे आना ही पड़ा। माना जाता है कि श्रीयंत्र की विधिवत पूजा करने से सुख और मोक्ष प्राप्त होता है। इसकी आराधना पूर्व दिशा की ओर मुंह रखकर करना चाहिए। तब आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी।

✡श्री यंत्र को सबसे महान और सर्वाधिक फल देने वाला यंत्र माना जाता है। कई लोग श्री यंत्र को लक्ष्मी यंत्र भी मानते हैं। धार्मिक मान्यतानुसार श्री यंत्र के पूजन से धन आगमन के रास्ते खुलते हैं।

🔯श्री यन्त्र की रचना त्रीकोण को मिला कर ही की गई हे और त्रीकोण के निचे वाला भाग भी त्रीकोण के सयोजन से ही बना हे जो की चोकोर होता हे सभी त्रीकोण को मिला कर बात करे तो ४३ त्रीकोण होते हे और सभी त्रीकोण को २ कमल घेरे हुए होते हे जिसमे पहला कमल अष्टदल का होता हे और दूसरा षोडशदाल का होता हे कमल और त्रीकोण के बिच दो वृत होते हे

✡अगर हम बात करे सभी यंत्रो की तो सभी यन्त्र अलग अलग कार्यो के लिए बनाए गए हे जिसमे से श्री यन्त्र सबसे ज्यादा शक्ति शाली हे श्री यन्त्र में सभी समा गए हे

🔯श्री यन्त्र एक मात्र ऐसा यन्त्र है जो सम्पूर्ण पृथ्वी पर सर्वत्र पाया जाता है किसी न किसी रूप में |अभी हाल ही में इनकी आकृति स्वयमेव अमेरिका की जमीन पर एक बड़े भूभाग पर उभर आई जिसको हवाई जहाज से देखा गया और वैज्ञानिकों की समझ में नहीं आया की एक दिन में ऐसा यन्त्र आकृति इतने बड़े भूभाग में कैसे चित्रित हो गई जमीन पर |गूगल पर इसके चित्र उपलब्ध हैं |माना जाता है की यह किसी अन्य ग्रह या लोक के किसी शक्ति शक्ति द्वारा चित्रित कर दी गई |श्री यन्त्र ब्रह्माण्ड में सर्वत्र पाया जाता है |आपको जानकार आश्चर्य होगा की ॐ की ध्वनि से जो तरंगीय आकृति उभरती है वह श्री यन्त्र की होती है |जैसे ॐ आदि ध्वनि और मूल ध्वनि है वैसे ही श्री चक्र या श्री यंत्र मूल आकृति है सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की |यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा संरचना की आकृति और संकेतक है |श्री स्सोक्त का पाठ वैदिक काल से होता रहा है ,वस्तुतः यह भी श्री चक्र अथवा श्री विद्या की ओर संकेत करता है की यह मूल आदि शक्ति है |साधकों में चक्र साधना ,चक्र निर्माण ,ज्यामितीय यंत्रादी का प्रयोग श्री चक्र से जुड़ा है और सभी देवी -देवताओं का श्री चक्र में स्थान है.

✡ इस यंत्र को मंदिर या तिजोरी में रखकर प्रतिदिन पूजा करने व प्रतिदिन कमलगट्टे की माला पर श्रीसूक्त के 12 पाठ के जाप करने से लक्ष्मी प्रसन्न रहती है।

🔯श्री यन्त्र ही एक अकेला साधन हे लक्ष्मी जी को आकर्षित करने का श्री यन्त्र से आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी हो जाती हे और सारी परेशानियां दूर हो जाती हे कितने लोगो के तो खली घर में श्री यन्त्र रखने से ही  अच्छे हो जाते हे

✡ जन्मकुंडली में मौजूद विभिन्न कुयोग श्रीयंत्र की नियमित पूजा से दूर हो जाते हैं।

✡ इसकी कृपा से मनुष्य को अष्टसिद्घियाँ और नौ निधियों की प्राप्ति होती है।

✡ श्रीयंत्र के पूजन से रोगों का नाश होता है।

✡ इस यंत्र की पूजा से मनुष्य को धन, समृद्घि, यश, कीर्ति की प्राप्ति होती है।

✡ रुके कार्य बनने लगते हैं। व्यापार की रुकावट खत्म होती है।

✡ श्री यंत्र साधना से संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता है।🚩*

SRI Yantra; Pyramid, Prosperity

SRI Yantra Pyramid with Coin

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