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Category: Chant


Today is 8th Day of Navratri or called Asthami. Very special day. Here are some of the amazing TIP that one should try for prosperity, removal of Evil eyes OR Negative Energies.

  1. Laghu Shankh/Shankhu:

Other name of Laghu Shankhu is Moti Shankh, it is believed that this Shankhu is dear to Maa Laxmi. Here is the Image of Laghu Shankhu.

The ancient text “Brahmaveivart Puraann” highlights the different forms of Goddess Lakshmi. It is described that Soubhaagya Lakshmi, who brings good luck, is present in Moti Shankh OR Laghu Shankhu. In other words if  one have a Moti Shankh at home the Goddess shall ever bless you with fortune. The Jain Tantra describes Padamavati Sadhana in great detail. In this sect, Lakshmi is worshipped in the form of Padamavati and Moti Shankh forms an important part of many Padamavati Sadhanas.

 

For Prosperity/Wealth:

It is believed that that on the day of Navratri Asthami (Today 17th Oct 2018) OR on Guru Pushp Nakshtra doing following rituals can bring prosperity and Wealth.

Procedure: After taking bath, wear fresh cloth for Pooja: You will need one Laghu Shankhu, Rice (full/whole Grain not half or damaged Rice grains), flowers (Red, Orange, Yellow), Roli (KumKum) OR best would be Asthgandha, Dhup and Diya. Sphatik Mala (see pic).

Take Laghu Shankhu, cleanse it with Ganga Water and place it on Red/White cotton cloth at your home temple or in NE direction. Do tilak of Kumkum (Roli) or Ashthgandha); Offer Dhoop, Diya and flowers. Chant 108 times (use Sphatik Mala) following Mantra, at each mantra offer 1 whole grain of Rice to Laghu Shankhu.

MANTRA: 

ॐ श्रीं ह्रीं दरिद्राय विनाशिनेधन धान्य समृद्धि देहि देहि नमः.

||Om Shreem Hreem Daaridray Vinaashinye Dhan Dhaanya Smriddhi Dehi Dehi Namah||

OR Other Mantra:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महा- लक्ष्मये नमः

“OM SHREEM HREEM SHREEM MAHA-LAMXMEY NAMAH”

Do above mentioned rituals for 11 days. On 11th Day, wrap the cloth and place it in Money Safe or Cash Box or at home temple. Placing this shell at home or in one’s shop or place of work is a sure way to remove all financial problems and become rich and prosperous. This Laghu shankh banishes poverty and boosts one’s profits in business.

Other Rituals that can also be beneficials:

Keeping this shell at home in one’s place of worship helps one gain the blessing of the Goddess Laxmi.
1. Early in the morning take some water in the shell and pour it into a bucket of water. Bathe with this water. This shall bring you good luck and fame.
2. A person wishing for wealth and riches in life should surely try this Sadhana. Placing this shell at home or in one’s shop or place of work is a sure way to remove all financial problems and become rich and prosperous.

Health Benefits of Laghu Shankhu:

  1. Store some water overnight in this shell and the next morning rub the water on your skin. This cures all skin problems. S
  2. Store water in the shell for 12 hours. Then rub it on white spots on the skin. Do this regularly. After some days the white spots shall disappear and healthy skin shall reappear.
  3. At night fill the shell with water and in the morning add some rose water to it. Then wash your hair with the mixture. This shall keep the hair black and healthy. The hair of the eyebrows and the beard too could be turned black thus.
  4. If you suffer from stomach related problems, then early in the morning drink a spoonful of water kept in the shell for 12 hours. This shall cure the problem.

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16 Zones (directions): North , North of NE, North-East(NE), East of NE East, East of SE, South-East (SE), South of SE, South, South of SW, South-West (SW), West of SW, West, West of NW, North-West (NW), North of NW. Each zone carries its own attributes, colours, patterns and associations with 5 elements (Water, wood, Fire, Earth and Space).

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आखिर क्यों करते हैं मंत्रोच्चार?
जानिये मंत्र विज्ञान के अध्यात्मिक व वैज्ञानिक फ़ायदे!!!
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शास्त्रकार कहते हैं-
‘मननात् त्रायते इति मंत्र:’
अर्थात मनन करने पर जो त्राण दे या रक्षा करे वही मंत्र है। धर्म, कर्म और मोक्ष की प्राप्ति हेतु प्रेरणा देने वाली शक्ति को मंत्र कहते हैं। तंत्रानुसार देवता के सूक्ष्म शरीर को या इष्टदेव की कृपा को मंत्र कहते हैं।
सही अर्थ में मंत्र जप का उद्देश्य अपने इष्ट को स्मरण करना है।

मंत्र शब्द संस्कृत भाषा से है। संस्कृत के आधार पर मंत्र शब्द का अर्थ सोचना, धारणा करना , समझना व् चाहना होता है। केवल हिन्दुओ में ही नहीं वरन बौध्द, जैन , सिक्ख आदि सभी धर्मों में मंत्र जप किया जाता है। मुस्लिम भाई भी तस्बियां घुमाते है।

हजारों वर्ष पूर्व मंत्र शक्ति के रहस्य को प्राचीनकाल में वैदिक ऋषियों ने ढूंढ निकाला था। उन्होंने उनकी शक्तियों को जानकर ही वेद मंत्रों की रचना की। वैदिक ऋषियों ने ब्रह्मांड की सूक्ष्म से सूक्ष्म और विराट से विराट ध्वनियों को सुना और समझा। इसे सुनकर ही उन्होंने मंत्रों की रचना की। उन्होंने जिन मंत्रों का उच्चारण किया, उन मंत्रों को बाद में संस्कृत की लिपि मिली और इस तरह संपूर्ण संस्कृत भाषा ही मंत्र बन गई। संस्कृत की वर्णमाला का निर्माण बहुत ही सूक्ष्म ध्वनियों को सुनकरकिया गया।

मंत्र को सदगुरू के माध्यम से ही ग्रहण करना उचित होता है| सदगुरू ही सही रास्ता दिखा सकते हैं, मंत्र का उच्चारण, जप संख्या, बारीकियां समझा सकते हैं, और साधना काल में विपरीत परिश्तिती आने पर साधक की रक्षा कर सकते हैं|

साधक की प्राथमिक अवशता में सफलता व् साधना की पूर्णता मात्र सदगुरू की शक्ति के माध्यम से ही प्राप्त होती है| यदि साधक द्वारा अनेक बार साधना करने पर भी सफलता प्राप्त न हो, तो सदगुरू विशेष शक्तिपात द्वारा उसे सफलता की मंजिल तक पहुंचा देते हैं|

इस प्रकार मंत्र जप के माध्यम से नर से नारायण बना जा सकता है, जीवन के दुखों को मिटाया जा सकता है तथा अदभुद आनन्द, असीम शान्ति व् पूर्णता को प्राप्त किया जा सकता है, क्योंकि मंत्र जप का अर्थ मंत्र कुछ शब्दों को रतना है, अपितु मंत्र जप का अर्थ है – जीवन को पूर्ण बनाना|

मंत्र साधना भी कई प्रकार की होती है। मं‍त्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है और मंत्र से किसी भूत या पिशाच को भी साधा जाता है। ‘मंत्र’ का अर्थ है मन को एक तंत्र में लाना। मन जब मंत्र के अधीन हो जाता है, तब वह सिद्ध होने लगता है। ‘मंत्र साधना’ भौतिक बाधाओं का आध्यात्मिक उपचार है।

भगवन श्रीकृष्ण जी ने गीता के १० वें अध्याय के २५ वें श्लोक में ‘जपयज्ञ’ को अपनी विभूति बताया है। जपयज्ञ सब के लिए आसान है। इसमें कोई ज्यादा खर्च नही , कोई कठोर नियम नही। यह जब चाहो तब किया जा सकता है।

मंत्र के प्रकार
मंत्र 3 प्रकार के होते हैं : 1. स्त्रीलिंग, 2. पुल्लिंग और 3. नपुंसक लिंग।

1. स्त्रीलिंग : ‘स्वाहा’ से अंत होने वाले मंत्र स्त्रीलिंग हैं।
2. पुल्लिंग : ‘हूं फट्’ वाले पुल्लिंग हैं।
3. नपुंसक : ‘नमः’ अंत वाले नपुंसक हैं।

*मंत्रों के शास्त्रोक्त प्रकार : 1. वैदिक, 2. पौराणिक और 3. साबर।
*कुछ विद्वान इसके प्रकार अलग बताते हैं : 1. वैदिक, 2. तांत्रिक और 3. साबर।

*वैदिक मंत्र के प्रकार : 1. सात्विक और 2. तांत्रिक।
* वैदिक मंत्रों के जप के प्रकार : 1. वैखरी, 2. मध्यमा, 3. पश्यंती और 4. परा।

1. वैखरी : उच्च स्वर से जो जप किया जाता है, उसे वैखरी मंत्र जप कहते हैं।
2. मध्यमा : इसमें होंठ भी नहीं हिलते व दूसरा कोई व्यक्ति मंत्र को सुन भी नहीं सकता।
3. पश्यंती : जिस जप में जिह्वा भी नहीं हिलती, हृदयपूर्वक जप होता है और जप के अर्थ में हमारा चित्त तल्लीन होता जाता है, उसे पश्यंती मंत्र जाप कहते हैं।
4. परा : मंत्र के अर्थ में हमारी वृत्ति स्थिर होने की तैयारी हो, मंत्र जप करते-करते आनंद आने लगे तथा बुद्धि परमात्मा में स्थिर होने लगे, उसे परा मंत्र जप कहते हैं।

जप का प्रभाव : वैखरी से भी 10 गुना ज्यादा प्रभाव मध्यमा में होता है। मध्यमा से 10 गुना प्रभाव पश्यंती में तथा पश्यंती से भी 10 गुना ज्यादा प्रभाव परा में होता है। इस प्रकार परा में स्थित होकर जप करें तो वैखरी का हजार गुना प्रभाव हो जाएगा।

*पौराणिक मंत्र के प्रकार :
पौराणिक मंत्र जप के प्रकार : 1. वाचिक, 2. उपांशु और 3. मानसिक।

1. वाचिक : जिस मंत्र का जप करते समय दूसरा सुन ले, उसको वाचिक जप कहते हैं।
2. उपांशु : जो मंत्र हृदय में जपा जाता है, उसे उपांशु जप कहते हैं।
3. मानसिक : जिसका मौन रहकर जप करें, उसे मानसिक जप कहते हैं।

* वैज्ञानिकों का भी मानना है कि ध्वनि तरंगें ऊर्जा का ही एक रूप हैं। मंत्र में निहित बीजाक्षरों में उच्चारित ध्वनियों से शक्तिशाली विद्युत तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो चमत्कारी प्रभाव डालती हैं।

* सकारात्मक ध्वनियां शरीर के तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं जबकि नकारात्मक ध्वनियां शरीर की ऊर्जा तक का ह्रास कर देती हैं। मंत्र और कुछ नहीं, बल्कि सकारात्मक ध्वनियों का समूह है, जो विभिन्न शब्दों के संयोग से पैदा होते हैं।

* मंत्रों की ध्वनि से हमारे स्थूल और सूक्ष्म शरीर दोनों सकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं। स्थूल शरीर जहां स्वस्थ होने लगता हैं, वहीं जब सूक्ष्म शरीर प्रभावित होता है तो हम में या तो सिद्धियों का उद्भव होने लगता है या हमारा संबंध ईथर माध्यम से हो जाता है और इस तरह हमारे मन व मस्तिष्क से निकली इच्छाएं फलित होने लगती हैं।

* निश्चित क्रम में संग्रहीत विशेष वर्ण जिनका विशेष प्रकार से उच्चारण करने पर एक निश्चित अर्थ निकलता है। अंत: मंत्रों के उच्चारण में अधिक शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। अशुद्ध उच्चारण से इसका दुष्प्रभाव भी हो सकता है।

* रामचरित मानस में मंत्र जप को भक्ति का 5वां प्रकार माना गया है। मंत्र जप से उत्पन्न शब्द शक्ति संकल्प बल तथा श्रद्धा बल से और अधिक शक्तिशाली होकर अंतरिक्ष में व्याप्त ईश्वरीय चेतना के संपर्क में आती है जिसके फलस्वरूप मंत्र का चमत्कारिक प्रभाव साधक को सिद्धियों के रूप में मिलता है।
श्रीरामचरित्र मानस में नवधा भक्ति का जिकर भी आता है। इसमें रामजी शबरी को कहते है की
‘मंत्र जप मम दृढ विस्वास ,
पंचम भक्ति सो वेद प्रकासा ‘
अर्थार्थ मंत्र जप और मुझमे पक्का विश्वास रखो।

* शाप और वरदान इसी मंत्र शक्ति और शब्द शक्ति के मिश्रित परिणाम हैं। साधक का मंत्र उच्चारण जितना अधिक स्पष्ट होगा, मंत्र बल उतना ही प्रचंड होता जाएगा।

* मंत्रों में अनेक प्रकार की शक्तियां निहित होती हैं जिसके प्रभाव से देवी-देवताओं की शक्तियों का अनुग्रह प्राप्त किया जा सकता है। मंत्र एक ऐसा साधन है, जो मनुष्य की सोई हुई सुसुप्त शक्तियों को सक्रिय कर देता है।

केन्द्रो पर मंत्र प्रभाव
हमारे शरीर में ७ केंद्र होते है। उनमे से नीचे के में घृणा , ईर्ष्या, भय, स्पर्धा , काम आदि होते है। लेकिन मंत्र जप के प्रभाव से जपने वाले का भय निर्भयता में , घृणा प्रेम में और काम राम में बदल जाता है।

प्रथम केंद्र मूलाधार होता है।

दूसरा स्वाधिष्ठान केंद्र होता है इसमें चिंता निश्चिंता में बदलती है। तीसरा केंद्र मणिपुर है। जिससे रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है। क्षमा शक्ति विकसित होती है।

सात बार ओम या हरिओम मंत्र का गुंजन करने से मूलाधार केंद्र में स्पंदन होता है जिससे रोगो के कीटाणु नष्ट होते है। क्रोध के हमारी जीवनी शक्ति का नाश होता है। वैज्ञानिकों का कहना है की यदि एक घंटे तक क्रोध करनेवाले व्यक्ति के श्वासों के कण इकट्ठे करके अगर इंजेक्शन बनाया जाये तो उस इंजेक्शन से २० लोगो को मारा जा सकता है।

यदि एक घंटे के क्रोध से २० लोगो की मृत्यु हो सकती है तो एक घंटे के हरिनाम कीर्तन से असंख्यों लोगों को आनंद व् मन की शांति मिलती है। मंत्र शक्ति में आश्चर्य नही तो क्या है। मंत्रशक्ति के द्वारा ये सब संभव है।

मंत्र जप और स्वास्थ्य
लगातार मंत्र जप करने से उछ रक्तचाप, गलत धारणायें, गंदे विचार आदि समाप्त हो जाते हैं| मंत्र जप का साइड इफेक्ट (Side Effect) यही है|
मंत्र में विद्यमान हर एक बीजाक्षर शरीर की नसों को उद्दिम करता है, इससे शरीर में रक्त संचार सही ढंग से गतिशील रहता है|
“क्लीं ह्रीं” इत्यादि बीजाक्षरों का एक लयात्मक पद्धति से उच्चारण करने पर ह्रदय तथा फेफड़ों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है व् उनके विकार नष्ट होते हैं|

जप के लिये ब्रह्म मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि उस समय पूरा वातावरण शान्ति पूर्ण रहता है, किसी भी प्रकार का कोलाहर या शोर नहीं होता| कुछ विशिष्ट साधनाओं के लिये रात्रि का समय अत्यंत प्रभावी होता है| गुरु के निर्देशानुसार निर्दिष्ट समय में ही साधक को जप करना चाहिए| सही समय पर सही ढंग से किया हुआ जप अवश्य ही फलप्रद होता है|

अपूर्व आभा
मंत्र जप करने वाले साधक के चेहरे से एक अपूर्व आभा आ जाति है| आयुर्वेद की दृष्टि से देखा जाय, तो जब शरीर शुद्ध और स्वास्थ होगा, शरीर स्थित सभी संस्थान सुचारू रूप से कार्य करेंगे, तो इसके परिणाम स्वरुप मुखमंडल में नवीन कांति का प्रादुर्भाव होगा ही|

जप माला
जप करने के लिए माला एक साधन है| शिव या काली के लिए रुद्राक्ष माला, हनुमान के लिए मूंगा माला, लक्ष्मी के लिए कमलगट्टे की माला, गुरु के लिए स्फटिक माला – इस प्रकार विभिन्न मंत्रो के लिए विभिन्न मालाओं का उपयोग करना पड़ता है|

मानव शरीर में हमेशा विद्युत् का संचार होता रहता है| यह विद्युत् हाथ की उँगलियों में तीव्र होता है| इन उँगलियों के बीच जब माला फेरी जाती है, तो लयात्मक मंत्र ध्वनि (Rythmic sound of the Hymn) तथा उँगलियों में माला का भ्रमण दोनों के समन्वय से नूतन ऊर्जा का प्रादुर्भाव होता है|

जप माला के स्पर्श (जप के समय में) से कई लाभ हैं –
* रुद्राक्ष से कई प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं|
* कमलगट्टे की माला से शीतलता एव अआनंद की प्राप्ति होती है|
* स्फटिक माला से मन को अपूर्व शान्ति मिलती है|

दिशा
दिशा को भी मंत्र जप में आत्याधिक महत्त्व दिया गया है| प्रत्येक दिशा में एक विशेष प्रकार की तरंगे (Vibrations) प्रवाहित होती रहती है| सही दिशा के चयन से शीघ्र ही सफलता प्राप्त होती है|

जप-तप
जप में तब पूर्णता आ जाती है, पराकाष्टा की स्थिति आ जाती है, उस ‘तप’ कहते हैं| जप में एक लय होता है| लय का सरथ है ध्वनि के खण्ड| दो ध्वनि खण्डों की बीच में निःशब्दता है| इस निःशब्दता पर मन केन्द्रित करने की जो कला है, उसे तप कहते हैं| जब साधक तप की श्तिति को प्राप्त करता है, तो उसके समक्ष सृष्टि के सारे रहस्य अपने आप अभिव्यक्त हो जाते हैं| तपस्या में परिणति प्राप्त करने पर धीरे-धीरे हृदयगत अव्यक्त नाद सुनाई देने लगता है, तब वह साधक उच्चकोटि का योगी बन जाता है| ऐसा साधक गृहस्थ भी हो सकता है और संन्यासी भी|

कर्म विध्वंस
मनुष्य को अपने जीवन में जो दुःख, कष्ट, दारिद्य, पीड़ा, समस्याएं आदि भोगनी पड़ती हैं, उसका कारण प्रारब्ध है| जप के माध्यम से प्रारब्ध को नष्ट किया जा सकता है और जीवन में सभी दुखों का नाश कर, इच्छाओं को पूर्ण किया जा सकता है, इष्ट देवी या देवता का दर्शन प्राप्त किया जा सकता है|

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Raksha (Protection) Mantra:

This mantra is known as Raksha – Suraksha OR Protection Mantra. This Mantra chanted by Jain Muni with Jain Mantras but I am sure anyone can play this Mantra with positive intent. I personally noticed its working and highly recommend to all.

आत्मरक्षाकर स्तोत्र

ऐसा माना गया है कि…घर से निकलते समय यदि यह मंत्र का ऑडियो भी सुन लिया जाये तो एक्सीडेंट होने की सम्भावना नहीं रहती व मृत्यु तुल्य दुर्घटना की सम्भावना भी समाप्त हो जाती है । यात्रा प्रारम्भ करने से पहले यह स्तोत्र अवश्य ही
सुनना चाहिए ।

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Comments are most welcome. If you need any specific help then do post question(s) and we will do our level best to address in upcoming post(s).

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*विष्णु सहस्रनाम मंत्र और इसके लाभ*

नुमेरोलॉजि में अंक 5 की सबसे बड़ा रेमेडी है। Remedy for number 5 in Numerology. Mercury Remedy. Ank 5 aisa number jo baki sub number se friend he or iska strong hone se baki anko se bhi fayda milta he।

Must Mantra for all those who has number 5 missing in their birthdate.

विष्णु सहस्रनाम एक ऐसा मंत्र है जिसमें विष्णु के हजार नामों का सम्मिश्रण है अर्थात अगर कोई व्यक्ति भगवान विष्णु के हजार नामों का जाप नहीं कर सकता है तो वह इस एक मंत्र का जाप कर सकता है। इस एक मंत्र में अथाह शक्ति छिपी हुई है जो कलयुग में सभी परेशानियों को दूर करने में सहायक है।

*विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र मंत्र :-*

नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।
सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नमः।।

Audio File – download it and play every morning – ideally during Brahma muhurta

 

★★★★★★★★★★★★★★★★★

*शैव और वैष्णवों के मध्य यह सेतु का कार्य करता है ये मंत्र :-*

इस मंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हिन्दू धर्म के दो प्रमुख सम्प्रदाय शैव और वैष्णवों के मध्य यह सेतु का कार्य करता है।

*विष्णु सहस्रनाम में विष्णु को शम्भु, शिव, ईशान और रुद्र के नाम से सम्बोधित किया है, जो इस तथ्य को प्रतिपादित करता है कि शिव और विष्णु एक ही है।* विष्णु सहस्रानम में प्रत्येक नाम के एक सौ अर्थ से कम नहीं हैं, इसलिए यह एक बहुत प्रकांड और शक्तिशाली मंत्र है, शंकराचार्य और पारसर भट्ट जैसे प्रसिद्ध व्यक्तित्व ने इस पवित्र पाठ पर टिप्पणियां लिखी हैं।

*विष्णु सहस्रनाम उद्ग्म स्रोत :-*

विष्णु सहस्रनम की उत्पत्ति महाकाव्य महाभारत से मानी जाती है, जब पितामह भीष्म, पांडवों से घिरे मौत के बिस्तर पर अपनी मृत्यु का इंतजार कर रहे थे, उस समय युधिष्ठिर ने उनसे पूछा, “पितामह! कृपया हमें बताएं कि सभी के लिए सर्वोच्च आश्रय कौन है? जिससे व्यक्ति को शांति प्राप्त हो सके, वह नाम कोनसा है जिससे इस भवसागर से मुक्ति प्राप्त हो सके, इस सवाल के जबाब में भीष्म ने कहा की वह नाम विष्णु सहस्रनाम है ।

*ज्योतिषीय लाभ :-*

यह नकारात्मक ज्योतिषीय प्रभावों को वश में करने में मदद करता है, इनमें उन दोषों को शामिल किया जाता है जो जन्म समय की ग्रहों की खराब स्थिति से उत्पन्न होते हैं, विष्णु सहस्त्रनाम बुरी किस्मत और श्राप से दूर कर सकता है।

*अच्छा भाग्य और तकदीर:-*

जो व्यक्ति विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करता है उसका भाग्य हमेशा उसका साथ देता है।

*मनोवैज्ञानिक फायदे :-*

इसका मनोवैज्ञानिक लाभ भी है , दैनिक विष्णु सहस्रनाम का जप करते हुए मन को काफी आराम मिलता हैं और अवांछित चिंताओं और विचलित विचारों से मुक्ति मिलती है, इससे मन में सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने और कुशलता सीखने को मिलती है।

*बाधाएं दूर होती हैं :-*

विष्णु सहस्त्रनामम अपने जीवन में बाधाओं को दूर करने का अंतिम उपाय है, यह आपके जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण योजनाओं को तेज़ी से और आपके रास्ते पर बाधाओं और चुनौतियों को दूर करने में मदद कर सकता है, बढ़ती ऊर्जा स्तर और आत्मविश्वास के साथ, आप अपने जीवन के लक्ष्यों की ओर जल्दी और ऊर्जावान रूप से आगे बढ़ सकते हो ।

*रक्षात्मक कवच*

भगवान विष्णु का नाम दुर्भाग्य, खतरों, काला जादू, दुर्घटनाओं और बुरी नज़रों से व्यक्ति की रक्षा करने के लिए एक बहुत शक्तिशाली कवच की तरह कार्य करता है और दुश्मनों की बुरी योजनाओं से मन और शरीर की सुरक्षा करता है।

*पापों को मिटाना*

यह शक्तिशाली मंत्र एक व्यक्ति को अपने सारे जन्मों में अपने सभी पापों को मुक्त करने में सहायता कर सकता है।

*सन्तति देता है :-*

विष्णु के हजारों नामों का जप करने से बांझपन को दूर करने और परिवार में संतान प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। यह घर में बच्चों के स्वास्थ्य और खुशी को बढ़ाता है और उनके समग्र कल्याण को बढ़ावा देता है।

This Moola Mantra is by Dr. Pillai; who claims this to be very effective.

The Mantra that gives “Everything to Everyone” ….
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This is the most powerful mantra that Dr Pillai have revealed to you. It came directly from Vishnu, the Protector God.
This is the mantra called the Moola Mantra, the fundamental mantra. You will be protected from diseases; from pain and aches, suffering; from financial problems; from ignorance.
You should RECITE this mantra as often as you can. Do it in the third eye and in the midbrain. It will be very powerful.
“OM AIM HREEM SARVA LOKAYA ADITYAYA SIVA SATGURU BABAYA SWAHA”
At other times, you can recite it wherever you are and whenever you have time. You can use the mala beads or rosary beads, and you can chant this mantra.
You will receive miracles. Others will receive miracles. The entire earth plane and the other realities as well, will be saved and will receive miracles through this mantra.

 

Watch Dr Pallai’s Video

 

Rohitt Shah

Vastu Achary, Master Numerologis and Lal Kitab – iBazi Consultant.

WhatsApp/Call: +7776034447 OR 9049410786

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सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।

सोने की मुद्राऐं:  

  •            उल्टा सोये भोगी,

  •            सीधा सोये योगी,

  •            दांऐं सोये रोगी,

  •            बाऐं सोये निरोगी।

शास्त्रीय विधान भी है।

आयुर्वेद में ‘वामकुक्षि’ की बात आती हैं,

बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।

शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आँखे बिगडती है।

सोते समय कितने गायत्री मंन्त्र /नवकार मंन्त्र गिने जाए :-

सूतां सात, उठता आठ”  सोते वक्त सात भय को दूर करने के लिए सात मंन्त्र गिनें और उठते वक्त आठ कर्मो को दूर करने के लिए आठ मंन्त्र गिनें।

सात भय:-” 

इहलोक,परलोक,आदान,

अकस्मात ,वेदना,मरण ,

अश्लोक (भय)

दिशा घ्यान:- 

दक्षिणदिशा (South) में पाँव रखकर कभी सोना नहीं चाहिए । यम और दुष्टदेवों का निवास है ।कान में हवा भरती है । मस्तिष्क  में रक्त का संचार कम को जाता है स्मृति- भ्रंश,व असंख्य बीमारियाँ होती है।

यह बात वैज्ञानिकों ने एवं वास्तुविदों ने भी जाहिर की है।

1:- पूर्व ( E ) दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।

2:-दक्षिण ( S ) में मस्तक रखकर सोने से धनलाभ व आरोग्य लाभ होता है ।

3:-पश्चिम( W ) में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती है ।

4:-उत्तर ( N ) में मस्तक रखकर सोने से हानि मृत्यु कारक ksh  होती है ।

अन्य धर्गग्रंथों में शयनविधि में और भी बातें सावधानी के तौर पर बताई गई है

 विशेष शयन की सावधानियाँ:- 

1:-मस्तक और पाँव की तरफ दीपक रखना नहीं। दीपक बायीं या दायीं और कम से कम 5 हाथ दूर होना चाहिये।

2:-संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी चाहिए।

3:-शय्या पर बैठे-बैठे निद्रा नहीं लेनी चाहिए।

4:-द्वार के उंबरे/ देहरी/थलेटी/चौकट पर मस्तक रखकर नींद न लें।

5:-ह्रदय पर हाथ रखकर,छत के पाट या बीम के नीचें और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।

6:-सूर्यास्त के पहले सोना नहीं चाहिए।

7:-पाँव की और शय्या ऊँची हो तो अशुभ है।  केवल चिकित्स उपचार हेतु छूट हैं ।

8:- शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है।

9:- सोते सोते पढना नहीं चाहिए।

10,:-ललाट पर तिलक रखकर सोना अशुभ है। (इसलिये सोते वक्त तिलक मिटाने का कहा जाता है। )

Rohitt Shah

Vastu Acharya and Master Numerologist

WahtsApp: 9049410786/7776034447

 

 

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