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Category: Occult Science


Raksha (Protection) Mantra:

This mantra is known as Raksha – Suraksha OR Protection Mantra. This Mantra chanted by Jain Muni with Jain Mantras but I am sure anyone can play this Mantra with positive intent. I personally noticed its working and highly recommend to all.

आत्मरक्षाकर स्तोत्र

ऐसा माना गया है कि…घर से निकलते समय यदि यह मंत्र का ऑडियो भी सुन लिया जाये तो एक्सीडेंट होने की सम्भावना नहीं रहती व मृत्यु तुल्य दुर्घटना की सम्भावना भी समाप्त हो जाती है । यात्रा प्रारम्भ करने से पहले यह स्तोत्र अवश्य ही
सुनना चाहिए ।

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Rohitt Shah (Vastu Acharya – Numero Vastu Guru)

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Top Business personality in India who had a failure:

Here is the case study of few well known personalities in India who had or facing criminal/fraud cases. This study is based on Numerology science and how name number and date of birth plays an importnat role in ones life.

DISCLAIMER: This is solely based on Numero study. Information gathered on individual cases are from online sources which may or maynot be accurate. In case of inaccuracy then one can ignore this study.

Please do note that remedies works best if Name number is best aligned with your date of birth.

Some of the Top Business personality in India who had a failure in their lives - Numero Case studies_Page_1

Some of the Top Business personality in India who had a failure in their lives - Numero Case studies_Page_2

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जानिए आपका कौन सा चक्र बिगड़ा है और उसे कैसे ठीक करे: –

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(1) मूलाधार चक्र- गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला ‘आधार चक्र’ है।आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। इसके बिगड़ने से वीरता,धन,समृधि ,आत्मबल,शारीरिक बल,रोजगार कर्मशीलता,घाटा,असफलता रक्त एवं हड्डी के रोग,कमर व पीठ में दर्द ,आत्महत्या के बिचार,डिप्रेशन,केंसर अ।दि होता है।

(2) स्वाधिष्ठान चक्र- इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है ।उसकी छ:पंखुरियाँ हैं।इसके बिगड़ने पर क्रूरता,गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, नपुंसकता,बाँझपन ,मंद्बुधिता,मूत्राशय और गर्भाशय के रोग ,अध्यात्मिक सिद्धी में बाधा बैभव के आनंद में कमी अदि होता है।

(3) मणिपूर चक्र- नाभि में दस दल वाला मणिपूर चक्रहै। इसके इसके बिगड़ने पर तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह, अधूरी सफलता,गुस्सा,चिंचिरापन, नशाखोरी,तनाव ,शंकलुप्रबिती,कई तरह की बिमारिया,दवावो का काम न करना,अज्ञातभय,चहरेक।तेजगायब ,धोखाधड़ी,डिप्रेशन,उग्रता
हिंशा,दुश्मनी,अपयश,अपमान,आलोचना,बदले की भावना ,एसिडिटी ,ब्लडप्रेशर,शुगर,थाईरायेड,सिर एवं शारीर के दर्द,किडनी ,लीवर ,केलोस्ट्राल,खून का रोग आदि इसके बिगड़ने का मतलब जिंदगी का बिगड़ जाना ।

(4) अनाहत चक्र- हृदय स्थान में अनाहत चक्र है । यह बारह पंखरियों वाला है। इसके बिगड़ने पर लिप्सा, कपट, तोड़-फोड़, कुतर्क, चिन्ता,नफरत ,प्रेम में असफलता ,प्यार में धोखा ,अकेलापन ,अपमान, मोह, दम्भ, अपनेपन में कमी ,मन में उदासी, जीवन में बिरानगी ,सबकुछ होते हुए भी बेचैनी ,छाती में दर्द ,साँस लेने में दिक्कत,सुख का अभाव,ह्रदय व फेफड़े के रोग,केलोस्ट्राल में बढ़ोतरी आदि।

(5) विशुद्ध चक्र –कण्ठ में विशुद्धख्य चक्र यह सरस्वती का स्थान है।यह सोलह पंखुरियों वाला है।यहाँ सोलह कलाएँ सोलह विभूतियाँ विद्यमान है, इसके बिगड़ने पर वाणी दोष,अभिब्यक्तिमें कमी,गले,नाक,कान,दात, थाईरायेड, आत्मजागरण में बाधा आती है।

(6) आज्ञा चक्र – भू्रमध्य में आज्ञा चक्र है, यहाँ उद्गीय, हूँ, फट, विषद, स्वधा स्वहा, सप्त स्वर आदि का निवास है । इसके बिगड़ने पर एकाग्रता,जीने की चाह,निर्णय की सक्ति, मानसिक सक्ति,सफलता की राह में अडचने आदि इसके बिगड़ने मतलब सबकुछ बिगड़ जाने का खतरा ।

(7) सहस्रार चक्र -सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में है। शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथियों से सम्बन्ध रैटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम का अस्तित्व है । वहाँ से जैवीय विद्युत का स्वयंभू प्रवाह उभरता है ।इसके बिगड़ने पर मानसिक बीमारी, अध्यात्मिकता का आभाव,भाग्य का साथ न देना अदि ।

उपाय

अभिमंत्रित 7 चक्र ब्रेसलेट धारण किजये।

चक्रो को सही करने के लिए चक्र के बीज मंत्र के जाप करे।

नीचे उपाय के पिक्चर्स ओर मंत्र का लिंक दिया गया है।
7 Chakra Bracelet। 7 चक्र ब्रेसलेट


Chakra Beej Mantra। चक्र बीज मंत्र:

7 Chakra IMage with Beej Mantra

7 Chakra Beej Mantras:

Chakra-beej-mantras-the-sounds-of-the-chakras

Chakra Chanting Video

वास्तु और 7 चक्

अगर घर मे वास्तु दोष रहेगा तो उसकी वजह से भी चक्ररा इम्बलनसे हो सकते है।

नंबर्स और चक्र

आपकी जन्म तारीख में मिसिंग नंबर्स का भी नेगेटिव प्रभाव चक्रो पे हो सकता है।

शनिवार को क्यों नहीं खरीदते हैं यह 10 तरह की चीजें..
ज्योतिष शास्त्र में जानिए ऐसी कौनसी वस्तुएं हैं जो शनिवार को घर नहीं लानी चाहिए

लोहे का सामान
भारतीय समाज में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है कि शनिवार को लोहे का बना सामान नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शनिवार को लोहे का सामान क्रय करने से शनि देव कुपित होते हैं।

इस दिन लोहे से बनी चीजों के दान का विशेष महत्व है। लोहे का सामान दान करने से शनि देव की कोप दृष्टि निर्मल होती है और घाटे में चल रहा व्यापार मुनाफा देने लगता है। इसके अतिरिक्त शनि देव यंत्रों से होने वाली दुर्घटना से भी बचाते हैं।

तेल
इस दिन तेल खरीदने से भी बचना चाहिए। हालांकि तेल का दान किया जा सकता है। काले श्वान को सरसों के तेल से बना हलुआ खिलाने से शनि की दशा टलती है। ज्योतिष के अनुसार, शनिवार को सरसों या किसी भी पदार्थ का तेल खरीदने से वह रोगकारी होता है।

नमक
नमक हमारे भोजन का सबसे अहम हिस्सा है। अगर नमक खरीदना है तो बेहतर होगा शनिवार के बजाय किसी और दिन ही खरीदें। शनिवार को नमक खरीदने से यह उस घर पर कर्ज लाता है। साथ ही रोगकारी भी होता है।

कैंची
कैंची ऐसी चीज है जो कपड़े, कागज आदि काटने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है। पुराने समय से ही कपड़े के कारोबारी, टेलर आदि शनिवार को नई कैंची नहीं खरीदते। इस दिन खरीदी गई कैंची रिश्तों में तनाव लाती है। इसलिए अगर आपको कैंची खरीदनी है तो किसी अन्य दिन खरीदें।

काले तिल
सर्दियों में काले तिल शरीर को पुष्ट करते हैं। ये शीत से मुकाबला करने के लिए शरीर की गर्मी को बरकरार रखते हैं। पूजन में भी इनका उपयोग किया जाता है। शनि देव की दशा टालने के लिए काले तिल का दान और पीपल के वृक्ष पर भी काले तिल चढ़ाने का नियम है, लेकिन शनिवार को काले तिल कभी न खरीदें। कहा जाता है कि इस दिन काले तिल खरीदने से कार्यों में बाधा आती है।

काले जूते
शरीर के लिए जितने जरूरी वस्त्र हैं, उतने ही जूते भी। खासतौर से काले रंग के जूते पसंद करने वालों की तादाद आज भी काफी है। अगर आपको काले रंग के जूते खरीदने हैं तो शनिवार को न खरीदें। मान्यता है कि शनिवार को खरीदे गए काले जूते पहनने वाले को कार्य में असफलता दिलाते हैं।

ज्वलनशील पदार्थ

रसोई के लिए ईंधन, माचिस, केरोसीन आदि ज्वलनशील पदार्थ आवश्यक माने जाते हैं। भारतीय संस्कृति में अग्नि को देवता माना गया है और ईंधन की पवित्रता पर विशेष जोर दिया गया है लेकिन शनिवार को ईंधन खरीदना वर्जित है। कहा जाता है कि शनिवार को घर लाया गया ईंधन परिवार को कष्ट पहुंचाता है।

झाड़ू
झाड़ू घर के विकारों को बुहार कर उसे निर्मल बनाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। झाड़ू खरीदने के लिए शनिवार को उपयुक्त नहीं माना जाता। शनिवार को झाड़ू घर लाने से दरिद्रता का आगमन होता है।

चक्की
इसी प्रकार अनाज पीसने के लिए चक्की भी शनिवार को नहीं खरीदनी चाहिए। माना जाता है कि यह परिवार में तनाव लाती है और इसके आटे से बना भोजन रोगकारी होता है।

स्याही (इंक)

विद्या मनुष्य को यश और प्रसिद्धि दिलाती है और उसे अभिव्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है कलम। कलम की ऊर्जा है स्याही। कागज, कलम और दवात आदि खरीदने के लिए सबसे श्रेष्ठ दिन गुरुवार है। शनिवार को स्याही न खरीदें। यह मनुष्य को अपयश का भागी बनाती है।

Vastu Tip:

मेन गेट के पास रखें पेड़-पौधे-
घर या दुकान के मेन गेट से ही कई तरह की एनर्जी प्रवेश करती है। नेगेटिव एनर्जी को रोकने और पॉजीटिव एनर्जी को बढ़ाने के लिए घर या दुकान के मेन गेट के आस-पास सुंदर और खुशबूदार पौधे लगाएं। ध्यान रखें कि पौधे कांटेदार या नुकीले न हो, ऐसे पौधे नेगेटिविटी को बढ़ाते हैं।

रोहित शाह

वास्तु आचार्य व मास्टर नुमेरोलॉजिस्ट

9049410786

7776034447

6356 20 5555

6356 20 6666

“जानिए घरों में किस चीज़ की धूनी (धूप) करने से होता है क्या फायदा”

हिंदू धर्म के अनुसार घरों में धूनी (धूप) देने की परंपरा काफी प्राचीन है। धूप देने से मन को शांति और प्रसन्नता मिलती है। साथ ही, मानसिक तनाव दूर करने में भी इससे बहुत लाभ मिलता है। घरों में धूनी देने के लिए कई तरह की चीज़ें आती है। आइए जानते है किस चीज़ की धूनी करने से क्या फायदे हो सकते है।

1-कर्पूर और लौंग

रोज़ाना सुबह और शाम घर में कर्पूर और लौंग जरूर जलाएं। आरती या प्रार्थना के बाद कर्पूर जलाकर उसकी आरती लेनी चाहिए। इससे घर के वास्तुदोष ख़त्म होते हैं। साथ ही पैसों की कमी नहीं होती।

2-गुग्गल की धूनी

हफ्ते में 1 बार किसी भी दिन घर में कंडे जलाकर गुग्गल की धूनी देने से गृहकलह शांत होता है। गुग्गल सुगंधित होने के साथ ही दिमाग के रोगों के लिए भी लाभदायक है।

3-पीली सरसों

पीली सरसों, गुग्गल, लोबान, गौघृत को मिलाकर सूर्यास्त के समय उपले (कंडे) जलाकर उस पर ये सारी सामग्री डाल दें। नकारात्मकता दूर हो जाएगी।

4-धूपबत्ती

घर में पैसा नहीं टिकता हो तो रोज़ाना महाकाली के आगे एक धूपबत्ती लगाएं। हर शुक्रवार को काली के मंदिर में जाकर पूजा करें।

5-नीम के पत्ते

घर में सप्ताह में एक या दो बार नीम के पत्ते की धूनी जलाएं। इससे जहां एक और सभी तरह के जीवाणु नष्ट हो जाएंगे। वही वास्तुदोष भी समाप्त हो जाएगा।

6-षोडशांग धूप

अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागर, चंदन, इलायची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गल, ये सोलह तरह के धूप माने गए हैं। इनकी धूनी से आकस्मिक दुर्घटना नहीं होती है।

7-लोबान धूनी

लोबान को सुलगते हुए कंडे या अंगारे पर रख कर जलाया जाता है, लेकिन लोबान को जलाने के नियम होते हैं इसको जलाने से पारलौकिक शक्तियां आकर्षित होती है। इसलिए बिना विशेषज्ञ से पूछे इसे न जलाएं।

8-दशांग धूप

चंदन, कुष्ठ, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगंध, जटामांसी, लघु और क्षौद्र सभी को समान मात्रा में मिलाकर जलाने से उत्तम धूप बनती है। इसे दशांग धूप कहते हैं। इससे घर में शांति रहती है।

9-गायत्री केसर

घर पर यदि किसी ने कुछ तंत्र कर रखा है तो जावित्री, गायत्री केसर लाकर उसे कूटकर मिला लें। इसके बाद उसमें उचित मात्रा में गुग्गल मिला लें। अब इस मिश्रण की धुप रोज़ाना शाम को दें। ऐसा 21 दिन तक करें।

ऐसा माना गया है कि बास की कांडी वाली धूप (अगरबत्ती) कभी भी यूज़ नही करनी चाहिये।

ग्रह दोष के पूर्व संकेत
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ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा-प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं।जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभाशुभ फल हमें मिलता है ।जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है, तो वह कुछ संकेत पहले से ही देने लगता है । ऐसे ही कुछ पूर्व संकेतों का विवरण यहाँ दृष्टव्य है।

सूर्य के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 सूर्य अशुभ फल देने वाला हो, तो घर में रोशनी देने वाली वस्तुएँ नष्ट होंगी या प्रकाश का स्रोत बंद होगा । जैसे – जलते हुए बल्ब का फ्यूज होना, तांबे की वस्तु खोना ।
👉 किसी ऐसे स्थान पर स्थित रोशनदान का बन्द होना, जिससे सूर्योदय से दोपहर तक सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता हो । ऐसे रोशनदान के बन्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं । जैसे – अनजाने में उसमें कोई सामान भर देना या किसी पक्षी के घोंसला बना लेने के कारण उसका बन्द हो जाना आदि ।
👉 सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । सूर्य जन्म-कुण्डली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है । यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है । सूर्य लग्नेश हो,तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है । मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है ।
👉 किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राज्य-पक्ष से परेशानी ।
👉 यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम ।
👉 शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द ।
👉 किसी कारण से फसल का सूख जाना ।
👉 व्यक्ति के मुँह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है ।
👉 सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है ।
👉 तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है

चन्द्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 जातक की कोई चाँदी की अंगुठी या अन्य आभूषण खो जाता है या जातक मोती पहने हो, तो खो जाता है।
👉 जातक के पास एकदम सफेद तथा सुन्दर वस्त्र हो वह अचानक फट जाता है या खो जाता है या उस पर कोई गहरा धब्बा लगने से उसकी शोभा चली जाती है।
👉 व्यक्ति के घर में पानी की टंकी लीक होने लगती है या नल आदि जल स्रोत के खराब होने पर वहाँ से पानी व्यर्थ बहने लगता है । पानी का घड़ा अचानक टूट जाता है ।
👉 घर में कहीं न कहीं व्यर्थ जल एकत्रित हो जाता है तथा दुर्गन्ध देने लगता है ।

उक्त संकेतों से निम्नलिखित विषयों में अशुभ फल दे सकते हैं ।
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👉 माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है या अन्य किसी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है ।
👉 नवजात कन्या संतान को किसी प्रकार से पीड़ा हो सकती है ।
👉 मानसिक रुप से जातक बहुत परेशानी का अनुभव करता है ।
👉 किसी महिला से वाद-विवाद हो सकता है ।
👉 जल से जुड़े रोग एवं कफ रोगों से पीड़ा हो सकती है । जैसे – जलोदर, जुकाम, खाँसी, नजला, हेजा आदि ।
👉 प्रेम-प्रसंग में भावनात्मक आघात लगता है ।
👉 समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है । मन में बहुत अशान्ति होती है ।
👉 घर का पालतु पशु मर सकता है ।
👉 घर में सफेद रंग वाली खाने-पीने की वस्तुओं की कमी हो जाती है या उनका नुकसान होता है । जैसे– दूध का उफन जाना ।
👉 मानसिक रुप से असामान्य स्थिति हो जाती है

मंगल के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 भूमि का कोई भाग या सम्पत्ति का कोई भाग टूट-फूट जाता है ।
👉 घर के किसी कोने में या स्थान में आग लग जाती है ।यह छोटे स्तर पर ही होती है ।
👉 किसी लाल रंग की वस्तु या अन्य किसी प्रकार से मंगल के कारकत्त्व वाली वस्तु खो जाती है या नष्ट हो जाती है।
👉 घर के किसी भाग का या ईंट का टूट जाना ।
👉 हवन की अग्नि का अचानक बन्द हो जाना ।
👉 अग्नि जलाने के अनेक प्रयास करने पर भी अग्नि का प्रज्वलित न होना या अचानक जलती हुई अग्नि का बन्द हो जाना ।
👉 वात-जन्य विकार अकारण ही शरीर में प्रकट होने लगना ।
👉 किसी प्रकार से छोटी-मोटी दुर्घटना हो सकती है ।

बुध के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 व्यक्ति की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है अर्थात् वह अच्छे-बुरे का निर्णय करने में असमर्थ रहता है ।
👉 सूँघने की शक्ति कम हो जाती है ।
👉काम-भावना कम हो जाती है । त्वचा के संक्रमण रोग उत्पन्न होते हैं । पुस्तकें, परीक्षा ले कारण धन का अपव्यय होता है । शिक्षा में शिथिलता आती है ।

गुरु के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 अच्छे कार्य के बाद भी अपयश मिलता है ।
👉 किसी भी प्रकार का आभूषण खो जाता है ।
👉 व्यक्ति के द्वारा पूज्य व्यक्ति या धार्मिक क्रियाओं का अनजाने में ही अपमान हो जाता है या कोई धर्म ग्रन्थ नष्ट होता है ।
👉 सिर के बाल कम होने लगते हैं अर्थात् व्यक्ति गंजा होने लगता है ।
👉 दिया हुआ वचन पूरा नहीं होता है तथा असत्य बोलना पड़ता है ।

शुक्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 किसी प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे – दाद,खुजली आदि उत्पन्न होते हैं ।
👉 स्वप्नदोष, धातुक्षीणता आदि रोग प्रकट होने लगते हैं ।
👉 कामुक विचार हो जाते हैं ।
👉 किसी महिला से विवाद होता है ।
👉 हाथ या पैर का अंगुठा सुन्न या निष्क्रिय होने लगता है ।

शनि के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 दिन में नींद सताने लगती है ।
👉 अकस्मात् ही किसी अपाहिज या अत्यन्त निर्धन और गन्दे व्यक्ति से वाद-विवाद हो जाता है ।
👉 मकान का कोई हिस्सा गिर जाता है ।
👉 लोहे से चोट आदि का आघात लगता है ।
👉 पालतू काला जानवर जैसे- काला कुत्ता, काली गाय, काली भैंस, काली बकरी या काला मुर्गा आदि मर जाता है ।
👉 निम्न-स्तरीय कार्य करने वाले व्यक्ति से झगड़ा या तनाव होता है ।
👉 व्यक्ति के हाथ से तेल फैल जाता है ।
👉 व्यक्ति के दाढ़ी-मूँछ एवं बाल बड़े हो जाते हैं ।
👉 कपड़ों पर कोई गन्दा पदार्थ गिरता है या धब्बा लगता है या साफ-सुथरे कपड़े पहनने की जगह गन्दे वस्त्र पहनने की स्थिति बनती है ।
👉 अँधेरे, गन्दे एवं घुटन भरी जगह में जाने का अवसर मिलता है ।

राहु के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 मरा हुआ सर्प या छिपकली दिखाई देती है ।
👉 धुएँ में जाने या उससे गुजरने का अवसर मिलता है या व्यक्ति के पास ऐसे अनेक लोग एकत्रित हो जाते हैं, जो कि निरन्तर धूम्रपान करते हैं ।
👉 किसी नदी या पवित्र कुण्ड के समीप जाकर भी व्यक्ति स्नान नहीं करता ।
👉 पाला हुआ जानवर खो जाता है या मर जाता है ।
👉 याददाश्त कमजोर होने लगती है ।
👉 अकारण ही अनेक व्यक्ति आपके विरोध में खड़े होने लगते हैं ।
👉 हाथ के नाखुन विकृत होने लगते हैं ।
👉 मरे हुए पक्षी देखने को मिलते हैं ।
👉 बँधी हुई रस्सी टूट जाती है । मार्ग भटकने की स्थिति भी सामने आती है । व्यक्ति से कोई आवश्यक चीज खो जाती है ।

केतु के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 मुँह से अनायास ही अपशब्द निकल जाते हैं ।
👉 कोई मरणासन्न या पागल कुत्ता दिखायी देता है।
👉 घर में आकर कोई पक्षी प्राण-त्याग देता है ।
👉 अचानक अच्छी या बुरी खबरें सुनने को मिलती है ।
👉 हड्डियों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।
👉 पैर का नाखून टूटता या खराब होने लगता है ।
👉 किसी स्थान पर गिरने एवं फिसलने की स्थिति बनती है ।
👉 भ्रम होने के कारण व्यक्ति से हास्यास्पद गलतियाँ होती।

Rohitt Shah (B. Eng., CSM)

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16 Zones (directions): North, North of NE, North-East(NE), East of NE East, East of SE, South-East (SE), South of SE, South, South of SW, South-West (SW), West of SW, West, West of NW, North-West (NW), North of NW. Each zone carries its own attributes, colours, patterns and associations with 5 elements (Water, wood, Fire, Earth and Space).

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