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आप अपने घर में #शिवलिंग स्थापित करने के बारे में सोच रहे हैं तो रखें कुछ बातों का ध्यान, फायदे में रहेंगे!
भगवन शिव के बारे में तो आप जानते ही हैं, वह बहुत ही दयालु भी हैं और क्रोधी स्वाभाव के भी हैं। जो उन्हें सच्चे मन से याद करता है, उसकी पुकार वह तुरंत सुन लेते हैं। अगर आपने भी अपने घर में #शिवलिंग स्थापित किया हुआ है या करने के बारे में सोच रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरुरी है। आप तो जानते ही हैं कि भगवन शिव जब क्रोधित हो जाते हैं, तो वह पूरी पृथ्वी का विनाश करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में कोई ऐसा काम ना करें या कोई ऐसी चीज चढ़ावे के रूप में ना चढ़ाएँ जो उन्हें पसंद ना हो। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जो शिवलिंग के साथ नहीं करनी चाहिए।

शिवलिंग के साथ ऐसा भूलकर भी ना करें…..

कोने में ना रखें:-

शिवलिंग अगर घर में स्थापित कर रहे हैं तो उसे भूलकर भी कोने में या किसी ऐसी जगह ना रखें जहाँ आप उसकी पूजा ना कर पायें। ऐसा करने से भगवन शिव क्रोधित हो जाते हैं, और उनके क्रोध से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है।

हल्दी ना चढ़ाएँ:-

जैसा की सभी जानते हैं हल्दी का इस्तेमाल औरतें अपनी खूबसूरती को बढ़ाने के लिए करती हैं। भगवान शिव को खुबसूरत दिखने की कोई इच्छा नहीं है, भगवन शिव एक पुरुष देवता हैं, इसलिए उन्हें हल्दी बिलकुल भी पसंद नहीं है। तो याद रखें उन्हें कभी भी हल्दी ना चढ़ाएँ।

सिंदूर के दूरी रखें:-

आप तो जानते ही हैं कि सिंदूर महिलाएँ लगाती हैं ताकि उनके पति की आयु लम्बी हो सके, और भगवन शिव विनाश के देवता हैं। इसलिए उन्हें सिंदूर बिलकुल भी पसंद नहीं है, तो इस बात का ध्यान रखें कि उन्हें भूलकर भी सिंदूर ना चढ़ाएँ।

स्थान ना बदलें:-

शिवलिंग का स्थान ना बदलें, अगर किन्ही विपरीत कारणों से ऐसा करना पड़ रहा है तो इस बात का ध्यान रखें की शिवलिंग को हटाने से पहले उसे गंगाजल और ठंढे दूध से स्नान करायें फिर उसकी जगह को बदलें। ऐसा ना करने से भगवन शिव क्रोधित हो जाते हैं।

बिना किसी बर्तन के दूध ना चढ़ाएँ:-

कुछ लोग होते हैं जो सोचते हैं कि सीधे दुकान से पैकेट वाला दूध ख़रीदा और चढ़ा दिया, ऐसा करने से बचना चाहिए। बिना किसी बर्तन के दूध कभी भी नहीं चढ़ाना चाहिए। दूध चढ़ाते वक़्त एक बात का और ध्यान रखें दूध बिलकुल ठंढा होना चाहिए, भले ही बाहर कोई भी मौसम हो।

शिवलिंग की बनावट का रखें ध्यान:-

शिवलिंग स्थापित करने से पहले इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि शिवलिंग सोने, चाँदी या पीतल का बना होना चाहिए। एक बात और ध्यान रखनी चाहिए कि बिना साँप वाला शिवलिंग भूलकर भी घर नहीं लाना चाहिए।

पानी का रखें ख़ास ध्यान:-

आप जब भी किसी शिव मंदिर में जाते होंगे तो आपने देखा होगा कि शिवलिंग के ऊपर एक पानी से भरा पात्र लटका रहता है, जिससे हर समय पानी टपकता रहता है। इसलिए जब आप भी अपने घर पर शिवलिंग स्थापित करें तो पानी की व्यवस्था ठीक तरह से करें। दिन हो या रात हो हर समय शिवलिंग के ऊपर पानी गिरना चाहिए।

शिवलिंग को अकेले ना रखें:-

जब आप अपने घर पर शिवलिंग स्थापित कर रहे हों तो इस बात का खासतौर पर ध्यान रखें कि शिवलिंग को कभी भी अकेले ना रखें। इसके साथ माँ पार्वती और गणेश की मूर्तियाँ भी रखें।

चन्दन का टिका लगायें:-

हर रोज स्नान करने के बाद शिवलिंग पर चन्दन का टिका लगायें, ऐसा माना जाता है कि इससे शिवलिंग पवित्र और ठंढा रहता है।

कभी ना चढ़ाएँ नारियल पानी:-

आपको इस बात का हमेशा ध्यान रखना होगा कि शिवलिंग पर कभी भी नारियल पानी नहीं चढ़ाना है। ऐसा करने से भगवान शिव क्रोधित हो सकते हैं। हालांकि आप इसकी जगह पर कच्चा नारियल चढ़ा सकते हैं।

कभी न चढ़ाएँ तुलसी की पत्ती:-

शिवलिंग पर भूलकर भी तुलसी की पत्तियाँ नहीं चढ़ानी चाहिए, शिवलिंग पर हमेशा बेलपत्र ही चढ़ाना चाहिए। बेलपत्र बहुत ही शुभ माना जाता है।

बेल चढ़ाएँ:-

बेल भगवन शिव को बहुत पसंद है, ऐसा माना जाता है कि यह फल चढ़ाने से इंसान की उम्र लम्बी होती है। इसलिए आप भी सुबह स्नान करने के बाद बेल के फल को भगवन शिव को चढ़ा सकते हैं, इससे आपकी उम्र और लम्बी हो जाएगी।

पंचामृत चढ़ाएँ:-

कोई भी पूजा शुरू करने से पहले शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएँ। पंचामृत दूध, गंगाजल और चीनी जैसे पाँच चीजों से मिलाकर बनाया जाता है।

केवल सफ़ेद फूल चढ़ाएँ:-

जब बात फूलों की हो तो हमेशा शिवलिंग पर सफ़ेद फूल ही चढ़ाने चाहिए, यह कहा जाता है कि सफ़ेद फूल भगवान शिव को बहुत ज्यादा पसंद हैं। यह भी कहा जाता है कि भगवन शिव को भूलकर भी केवड़ा और चंपा के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन फूलों को भगवन शिव ने अभिशाप दिया था।

अभिषेक:-

जब भी शिवलिंग का अभिषेक करें इस बात का ध्यान रखें कि हमेशा शिवलिंग का अभिषेक चाँदी, सोने या पीतल से बने नाग योनी जैसे किसी पात्र में करना चाहिए। अभिषेक करते समय इस बात का भी ध्यान रखें की अभिषेक कभी भी स्टील के स्टैंड में नहीं करना चाहिए।

शिवलिंग पर चढ़ाया कभी ना खाएं:-

यह कहा जाता है कि जो भी शिवलिंग पर चढ़ाएँ उसे खुद कभी भी ना खाएं, हमेशा शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ दूसरों को बाँट देना चाहिए। जो शिवलिंग पर चढ़ाये हुए को खुद ही खा लेते हैं, ऐसा माना जाता है कि उनका भाग्य बुरा हो जाता है।

सौन्दर्य की कोई भी वस्तु ना चढ़ाएँ:-

सिंदूर की तरह ही भूलकर कोई भी सौन्दर्य प्रसाधन की वस्तु को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसी चीजें केवल आप माँ पार्वती की मूर्ति पर चढ़ा सकते हैं।

!!ॐ नम: शिवाय!!

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तिजोरी या गल्ले में लगाएं आइना-
अपने घर या दुकान की तिजोरी या गल्ले में आइना लगाएं। ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे आमदनी अधिक होती है और पैसे भी कई गुना बढ़ जाते हैं। साथ ही गल्ले में चांदी या सोना का सिक्का रखना भी बहुत अच्छा माना जाता है।

मेरा खुद का अनुभव किया हुआ है और मेरे सब क्लाइंट लोगो को भी बताया गया टिप्स है। में चाहता हु आप सब को भी फायदा हो।

अगर नेगेटिव चीज़े रखी होगी तो उसका भी वैसा ही प्रभाव मिलेगा।

Place reflective mirror on all side of money drawer or your safe to increase the growth in money. If you keep negative items in drawer or safe then expect increase in negativity as well …Such as bills etc…

धन की कमी से ऐसे निपटें- राशि अनुसार अपनाएं सरल उपाय :-

धन की तंगी से जूझते लोगों के लिए अनमोल और कारगर उपाय। यह उपाय 12 राशियों के अनुसार बताए गए हैं। यह उपाय अगर अपने ईष्ट का स्मरण कर भक्ति भाव से पूजन और नियम से किए जाएं तो अवश्य ही घोर धन संकट का समाधान होता है। हमारे वेद और पुराणों में भी कर्म की आवश्यकता के बारे में बताया गया है। अत: धर्म के साथ कर्म अवश्य करें। सफलता जरूर मिलेगी।

मेष के लिए उपाय
मेष- मेष राशि वाले जातकों को शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए। अधिक फायदे के लिए उसमें दो काली मिर्च डाल दें। इस उपाय से जल्दी ही आर्थिक परेशानी दूर होती है। इसके अलावा अगर धन संबंधी कोई मामला अटका है तो उसमें भी फायदा होता है।

वृषभ के लिए उपाय
वृषभ – राशि वाले जातकों को आर्थिक फायदे के लिए पीपल के 5 पत्ते लेकर उन पर पीला चंदन लगाना चाहिए। इन पत्तों को किसी नदी या बहते हुए जल में बहाने से आर्थिक संकट शर्तिया दूर होता है। जमा पूंजी में वृद्धि करने, बढ़ाने के लिए पीपल के पेड़ पर चंदन लगाए और जल चढ़ाएं।

मिथुन राशि के लिए उपाय
मिथुन – राशि वाले जातकों को व्यापार या घर में धन वृद्धि के लिए बरगद के पांच फल लाकर उसे लाल चंदन में रंग कर नए लाल वस्त्र में कुछ सिक्कों के साथ बांध कर अपने घर अथवा दुकान के अग्रभाग में लगाना चाहिए इससे कल्पनातीत धन की प्राप्ति होती है।

कर्क राशि के लिए उपाय
कर्क – राशि वाले जातकों को धन प्राप्ति के लिए संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे तेल का पंचमुखी दिया जलाना चाहिए। इसके बाद करबद्ध होकर माता लक्ष्मी से धन लाभ की प्रार्थना करें। अचानक धन की प्राप्ति होगी।

सिंह राशि के लिए उपाय
सिंह – राशि वाले जातक यदि आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं और कुछ भी सही नहीं चल रहा है तो उनके लिए एक उपाय है कि वे कौड़ियों को हल्दी के घोल में भिगो कर उन्हें अपने पूजा घर में रखें, लेकिन इससे पूर्व लक्ष्मी जी के साथ उसकी पूजा करें।

कन्या राशि वालों के लिए उपाय
कन्या-राशि वाले जातकों के लिए बहुत ही सुंदर उपाय है। आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए – दो कमलगट्टे लेकर उन्हें माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करते हुए धन प्राप्ति की कामना करें।

तुला राशि के जातकों के लिए उपाय
तुला- तुला राशि वाले जातकों के लिए धन प्राप्ति हेतु सरल उपाय है। आपको शुक्र-पुष्य नक्षत्र का इंतजार करना होगा। इस शुभ नक्षत्र में लक्ष्मी मंदिर जाकर उन्हें पांच नारियल चढ़ाएं और सभी को नारियल का प्रसाद बांटे। हां एक साबूत नारियल को अपने पास रख लें। उसे आप बहते जल में बहा दें।

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए उपाय
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले जातक का स्वामी ग्रह मंगल होता है। वे हमेशा अपने दिमाग में उलझे रहते हैं। यदि वे कर्ज की उलझन में फंसे हैं तो संध्या काल किसी भी विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में जाएं और वहां का जल एक पात्र में भर कर ले आएं, बाद में उसे पीपल के पेड़ की जड़ों में चढ़ा दें। इसके अलावा वह चाहें तो बड़ के पत्ते पर आटे का दिया जला कर उसे हनुमान जी के मंदिर में पांच मंगलवार को रखें।

धनु राशि के जातकों के लिए उपाय
धनु- धनु राशि वाले जातक यदि अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं तो गुलर के ग्यारह पत्तों को नाड़े से बांधकर किसी बरगद के वृक्ष पर बांध दें। आपकी मनोकामना पूरी होगी। इसके अलावा पीली कौड़ियां भी जेब में रख सकते हैं।

मकर राशि के जातकों के लिए उपाय
मकर- मकर राशि के जातकों के लिए आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए बहुत ही उत्तम उपाय है। उसके लिए आप शाम को आक की रूई का दीपक या एक रोटी अपने ऊपर से 21 बार उतार (वार) कर किसी तिराहे पर रख सकते हैं। इससे घर में बरकत रहने लगेगी।

कुंभ राशि के जातकों के लिए उपाय
कुंभ- कुंभ राशि के जातकों के लिए धन प्राप्त करने के बहुत ही सुंदर उपाय है। आप विष्णु-लक्ष्मी की संयुक्त रूप से प्रार्थना-पूजन करें। जहां पूजन करें वहीं रात भर जागरण करें। आपकी आर्थिक तंगी दूर होगी।

मीन राशि के जातकों के लिए उपाय
मीन- मीन राशि के जातकों के लिए धन लाभ हेतु बहुत ही सरल उपाय है। आप काली हल्दी की पूजा कर उसे अपने गल्ले में रखें और प्रतिदिन उसकी पूजा करें। यदि व्यापार में लाभ नहीं हो रहा है तो यह समस्या दूर हो जाएगी।

हमारे घनिष्ठ मित्र प• मणिकान्त पाण्डे॥

रोहित शाह

वास्तु आचार्य, मास्टर नुमेरोलॉजिस्ट, लाल किताब & फेंगशुई कंसल्टेंट

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🌷 ज्योतिष टिप्स 🌷
ज्योतिष शास्त्र और वास्तु शास्त्र में अनेक चीजों का प्रयोग किया जाता है। ऐसे ही एक चीज है कौड़ी।
यह समुद्र से निकलती है और सजावट में भी आती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धन प्राप्ति के लिए किए जाने वाले अनेक उपायों में भी कौड़ी का उपयोग किया जाता है।
🙏🏻 धर्म ग्रंथों के अनुसार, धन की देवी लक्ष्मी समुद्र से उत्पन्न हुई हैं और कौड़ी भी समुद्र से ही निकलती है। इसलिए कौड़ी में धन को आकर्षित करने का स्वभाविक गुण होता है। कौड़ी के इन उपायों से कोई भी व्यक्ति धनवान हो सकता है। ये उपाय बहुत ही आसान हैं। कौड़ी के कुछ अासान उपाय इस प्रकार हैं…
➡ 1. लक्ष्मी पूजा में 11 पीली कौड़ियां रखें और बाद में इन्हें लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें। इससे धन लाभ के योग बन सकते हैं।
➡ 2. यदि प्रमोशन नहीं हो रहा है तो 11 कौड़ियां लेकर किसी लक्ष्मी मंदिर में अर्पित कर दें। आपके प्रमोशन के रास्ते खुल सकते हैं।
➡ 3. इंटरव्यू पर जाने से पहले 7 कौड़ियों की पूजा करें और एक लाल कपड़े में बांधकर अपने साथ ले जाएं। इससे सफलता मिल सकती है।
➡ 4. यदि दुकान से मुनाफा नहीं हो रहा हो तो गल्ले में 7 कौड़ियां रखें और सुबह-शाम इनकी पूजा करें। इससे फायदा होने लगेगा।
➡ 5. नया घर बनवाते समय उसकी नींव (ब्रह्मस्थान) में नाभि विधि की सामग्री के साथ में 21 कौड़ियां डाल दें। ऐसा करने से नए घर में हमेशा सुख-शांति व खुशहाली बनी रहेगी। पुराने घर में भी नाभि विधि कर सकते हो.

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*रोहित शाह*
वास्तु आचार्य, मास्टर नुमेरोलॉजिस्ट ओर लाल किताब & फेंगशुई कंसल्टेंट।
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गाय से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।

2. गौ माता में तैंतीस कोटी(प्रकार के) देवी देवताओं का वास है ।

3. जिस जगह गौ माता खुशी से रम्भाने लगे उस जगह देवी देवता अदृश्य पुष्प वर्षा करते हैं ।

4. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे । गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है ।

5. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है ।

6. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते ।

7. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है ।

8. गौ माता के मुत्र में गंगाजी का वास होता है ।

9. गौ माता के गोबर से बने उपलों का रोजाना घर-दूकान-मंदिर परिसरों पर धुप करने से वातावरण शुद्ध होता है सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

10. गौ माता की एक आंख में सूर्य देव व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है ।

11. गाय इस धरती पर साक्षात देवता है ।

12. गौ माता अन्नपूर्णा देवी है कामधेनु है । मनोकामना पूर्ण करने वाली है ।

13. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है।

14. गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है ।

15. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है । उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है ।

16. गौ माता का दूध अमृत है।

17. गौ माता धर्म की धुरी है। गौ माता के बिना धर्म की कल्पना नहीं की जा सकती ।

18. गौ माता जगत जननी है।

19. गौ माता पृथ्वी का रूप है।

20. गौ माता सर्वो देवमयी सर्वोवेदमयी है । गौ माता के बिना देवों वेदों की पूजा अधुरी है ।

21. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी(प्रकार के) देवी देवताओं को भोग लग जाता है ।

22. गौ माता से ही मनुष्यों के गौत्र की स्थापना हुई है ।

23. गौ माता चौदह रत्नों में एक रत्न है ।

24. गौ माता साक्षात् मां भवानी का रूप है ।

25. गौ माता के पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नहीं होते हैं ।

26. गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं ।

27. गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है । उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती ।

28. तन मन धन से जो मनुष्य गौ सेवा करता है । वो वैतरणी गौ माता की पूँछ पकङ कर पार करता है। उन्हें गौ लोकधाम में वास मिलता है ।

28. गौ माता के गोबर से ईंधन तैयार होता है ।

29. गौ माता सभी देवी देवताओं मनुष्यों की आराध्य है; इष्ट देव है ।

30. साकेत स्वर्ग इन्द्र लोक से भी ऊँचा गौ लोक धाम है।

31. गौ माता के बिना संसार की रचना अधुरी है ।

32. गौ माता में दिव्य शक्तियां होने से संसार का संतुलन बना रहता है ।

33. गाय माता के गौवंशो से भूमि को जोत कर की गई खेती सर्वश्रेष्ठ खेती होती है ।

34. गौ माता जीवन भर दुध पिलाने वाली माता है । गौ माता को जननी से भी उच्चा दर्जा दिया गया है ।

35. जहां गौ माता निवास करती है वह स्थान तीर्थ धाम बन जाता है ।

36. गौ माता की सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यों का लाभ मिलता है ।

37. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये , गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है ।

38. गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है ।

39. गाय माता आनंदपूर्वक सासें लेती है; छोडती है । वहां से नकारात्मक ऊर्जा भाग जाती है और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है जिससे वातावरण शुद्ध होता है ।

40. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे ।

41. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं ।

42. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है ।

43. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं ।

44. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है ।

45. गाय इस संसार का प्राण है ।

46. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है ।

47. गाय धार्मिक ; आर्थिक ; सांस्कृतिक व अध्यात्मिक दृष्टि से सर्वगुण संपन्न है ।

48. गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि(प्रकार के) देवी देवता है । हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं ।

49. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये , रूका हुआ काम बन जायेगा ।

50. जो व्यक्ति मोक्ष गौ लोक धाम चाहता हो उसे गौ व्रती बनना चाहिए ।

51. गौ माता सर्व सुखों की दातार है ।

हे मां , आप अनंत हैं , आपके गुण अनंत हैं , इतना मुझमें सामर्थ्य नहीं कि मैं आपके गुणों का बखान कर सकूं ।

Rohitt Shah

Vastu Acharya & Master Numerologist

9049410786

7776034447

MysticValues@gmail.com

भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है, उनके बारे में यहां प्रस्तुत हैं 35 रहस्य।

1. आदिनाथ शिव

सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें ‘आदिदेव’ भी कहा जाता है। ‘आदि’ का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम ‘आदिश’ भी है।

2. शिव के अस्त्र-शस्त्र

शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था।

3. शिव का नाग

शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।

4. शिव की अर्द्धांगिनी

शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं।

5. शिव के पुत्र

शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है।

6. शिव के शिष्य

शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे।

7. शिव के गण

शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख हैं। इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। शिवगण नंदी ने ही ‘कामशास्त्र’ की रचना की थी। ‘कामशास्त्र’ के आधार पर ही ‘कामसूत्र’ लिखा गया।

8. शिव पंचायत

भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु ये शिव पंचायत कहलाते हैं।

9. शिव के द्वारपाल

नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल।

10. शिव पार्षद

जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि शिव के पार्षद हैं।

11. सभी धर्मों का केंद्र शिव

शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। मुशरिक, यजीदी, साबिईन, सुबी, इब्राहीमी धर्मों में शिव के होने की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शिव के शिष्यों से एक ऐसी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर शैव, सिद्ध, नाथ, दिगंबर और सूफी संप्रदाय में वि‍भक्त हो गई।

12. बौद्ध साहित्यके मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर।

13. देवता और असुर दोनों के प्रिय शिव

भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष आदि सभी पूजते हैं। वे रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी। उन्होंने भस्मासुर, शुक्राचार्य आदि कई असुरों को वरदान दिया था। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं।

14. शिव चिह्न

वनवासी से लेकर सभी साधारण व्‍यक्ति जिस चिह्न की पूजा कर सकें, उस पत्‍थर के ढेले, बटिया को शिव का चिह्न माना जाता है। इसके अलावा रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं, हालांकि ज्यादातर लोग शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का पूजन करते हैं।

15. शिव की गुफा

शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशूल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर है। दूसरी ओर भगवान शिव ने जहां पार्वती को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा ‘अमरनाथ गुफा’ के नाम से प्रसिद्ध है।

16. शिव के पैरों के निशान

श्रीपद- श्रीलंका में रतन द्वीप पहाड़ की चोटी पर स्थित श्रीपद नामक मंदिर में शिव के पैरों के निशान हैं। ये पदचिह्न 5 फुट 7 इंच लंबे और 2 फुट 6 इंच चौड़े हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम कहते हैं। कुछ लोग इसे आदम पीक कहते हैं।

रुद्र पद- तमिलनाडु के नागपट्टीनम जिले के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्‍वर का मंदिर में शिव के पदचिह्न हैं जिसे ‘रुद्र पदम’ कहा जाता है। इसके अलावा थिरुवन्नामलाई में भी एक स्थान पर शिव के पदचिह्न हैं।

तेजपुर- असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में शिव के दाएं पैर का निशान है।

जागेश्वर- उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी से लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में भीम के मंदिर के पास शिव के पदचिह्न हैं। पांडवों को दर्शन देने से बचने के लिए उन्होंने अपना एक पैर यहां और दूसरा कैलाश में रखा था।

रांची- झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर ‘रांची हिल’ पर शिवजी के पैरों के निशान हैं। इस स्थान को ‘पहाड़ी बाबा मंदिर’ कहा जाता है।

17. शिव के अवतार

वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि हुए हैं। वेदों में रुद्रों का जिक्र है। रुद्र 11 बताए जाते हैं- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शंभू, चण्ड तथा भव।

18. शिव का विरोधाभासिक परिवार

शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जबकि शिव के गले में वासुकि नाग है। स्वभाव से मयूर और नाग आपस में दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। इस विरोधाभास या वैचारिक भिन्नता के बावजूद परिवार में एकता है।

19. ति‍ब्बतस्थित कैलाश पर्वत पर उनका निवास है। जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है।

20.शिव भक्त :ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं सहित भगवान राम और कृष्ण भी शिव भक्त है। हरिवंश पुराण के अनुसार, कैलास पर्वत पर कृष्ण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी।

21.शिव ध्यान :शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग को बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है।

22.शिव मंत्र :दो ही शिव के मंत्र हैं पहला- ॐ नम: शिवाय। दूसरा महामृत्युंजय मंत्र- ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥ है।

23.शिव व्रत और त्योहार :सोमवार, प्रदोष और श्रावण मास में शिव व्रत रखे जाते हैं। शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शिव का प्रमुख पर्व त्योहार है।

24.शिव प्रचारक :भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

25.शिव महिमा :शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर जैसे कई असुरों को वरदान दिया था। शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। शिव ने गणेश और राजा दक्ष के सिर को जोड़ दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया था।

26.शैव परम्परा :दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव परंपरा से हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की परंपरा से ही माने जाते हैं। भारत की असुर, रक्ष और आदिवासी जाति के आराध्य देव शिव ही हैं। शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है।

27.शिव के प्रमुख नाम :शिव के वैसे तो अनेक नाम हैं जिनमें 108 नामों का उल्लेख पुराणों में मिलता है लेकिन यहां प्रचलित नाम जानें- महेश, नीलकंठ, महादेव, महाकाल, शंकर, पशुपतिनाथ, गंगाधर, नटराज, त्रिनेत्र, भोलेनाथ, आदिदेव, आदिनाथ, त्रियंबक, त्रिलोकेश, जटाशंकर, जगदीश, प्रलयंकर, विश्वनाथ, विश्वेश्वर, हर, शिवशंभु, भूतनाथ और रुद्र।

28.अमरनाथ के अमृत वचन :शिव ने अपनी अर्धांगिनी पार्वती को मोक्ष हेतु अमरनाथ की गुफा में जो ज्ञान दिया उस ज्ञान की आज अनेकानेक शाखाएं हो चली हैं। वह ज्ञानयोग और तंत्र के मूल सूत्रों में शामिल है। ‘विज्ञान भैरव तंत्र’ एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव द्वारा पार्वती को बताए गए 112 ध्यान सूत्रों का संकलन है।

29.शिव ग्रंथ :वेद और उपनिषद सहित विज्ञान भैरव तंत्र, शिव पुराण और शिव संहिता में शिव की संपूर्ण शिक्षा और दीक्षा समाई हुई है। तंत्र के अनेक ग्रंथों में उनकी शिक्षा का विस्तार हुआ है।

30.शिवलिंग :वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है, उसे लिंग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही लिंग की प्रतीक है। वस्तुत: यह संपूर्ण सृष्टि बिंदु-नाद स्वरूप है। बिंदु शक्ति है और नाद शिव। बिंदु अर्थात ऊर्जा और नाद अर्थात ध्वनि। यही दो संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। इसी कारण प्रतीक स्वरूप शिवलिंग की पूजा-अर्चना है।

31.बारह ज्योतिर्लिंग :सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वनाथजी, त्र्यम्बकेश्वर, केदारनाथ, घृष्णेश्वर। ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति के संबंध में अनेकों मान्यताएं प्रचलित है। ज्योतिर्लिंग यानी ‘व्यापक ब्रह्मात्मलिंग’ जिसका अर्थ है ‘व्यापक प्रकाश’। जो शिवलिंग के बारह खंड हैं। शिवपुराण के अनुसार ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग या ज्योति पिंड कहा गया है। दूसरी मान्यता अनुसार शिव पुराण के अनुसार प्राचीनकाल में आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इस तरह के अनेकों उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे। भारत में गिरे अनेकों पिंडों में से प्रमुख बारह पिंड को ही ज्‍योतिर्लिंग में शामिल किया गया।
32.शिव का दर्शन :शिव के जीवन और दर्शन को जो लोग यथार्थ दृष्टि से देखते हैं वे सही बुद्धि वाले और यथार्थ को पकड़ने वाले शिवभक्त हैं, क्योंकि शिव का दर्शन कहता है कि यथार्थ में जियो, वर्तमान में जियो, अपनी चित्तवृत्तियों से लड़ो मत, उन्हें अजनबी बनकर देखो और कल्पना का भी यथार्थ के लिए उपयोग करो। आइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

33.शिव और शंकर :शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं– शिव, शंकर, भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। अत: शिव और शंकर दो अलग अलग सत्ताएं है। हालांकि शंकर को भी शिवरूप माना गया है। माना जाता है कि महेष (नंदी) और महाकाल भगवान शंकर के द्वारपाल हैं। रुद्र देवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं।

34.देवों के देव महादेव :देवताओं की दैत्यों से प्रतिस्पर्धा चलती रहती थी। ऐसे में जब भी देवताओं पर घोर संकट आता था तो वे सभी देवाधिदेव महादेव के पास जाते थे। दैत्यों, राक्षसों सहित देवताओं ने भी शिव को कई बार चुनौती दी, लेकिन वे सभी परास्त होकर शिव के समक्ष झुक गए इसीलिए शिव हैं देवों के देव महादेव। वे दैत्यों, दानवों और भूतों के भी प्रिय भगवान हैं। वे राम को भी वरदान देते हैं और रावण को भी।

35.शिव हर काल में :भगवान शिव ने हर काल में लोगों को दर्शन दिए हैं। राम के समय भी शिव थे। महाभारत काल में भी शिव थे और विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण अनुसार राजा हर्षवर्धन को भी भगवान शिव ने दर्शन दिए थे।
🙏ॐ नमः शिवाय🙏। हर हर महादेव जी।भगवान शिव के 35 रहस्य, शर्तिया चौंक जाएंगे आप

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