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Category: Your Rashi


Many of us have heard of Rudraksha bead and its benefits. Many are wearing Rudraksha as well as but do not know the association of if faced Rudraksha. Here is the tabel that gives basic relationship between Planets and Rudraksha Faced as well as associate deity, Mantras one should chant as well as PanchAkshari Mantra.

Do read the Note Section is it gives scientific weightage on Rudraksha.  At bottom of this page.. there is a list of Research articles on Rudraksha.

Rudraksh The Mystery Bead by Mystic Solutions

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A list of Research paper/articles:

  • “A note on rudraksha, Elaeocarpus sphaericus (Gaertn.) K. Schum” by (? – Krishnamurthy, T.) (1964), Indian Forester 90, 11, 774-776.
  • “Action of a fraction of Elaeocarpus Ganitrus on Muscles” – Bhattacharya S.S. Sarkar, P.R. G. Kar, (Medical College Calcutta)
  • “Anticonvulsant activity of the mixed fatty acids of Elaeocarpus ganitrus roxb. (Rudraksh)” by Dasgupta A, Agarwal SS, Basu DK., Indian J Physiol Pharmacol. 1984 Jul-Sep; 28(3) : 245-6.
  • “Anti-inflammatory activity of Elaeocarpus sphaericus fruits extracts in rats” by R. K. Singh and B. L. Pandey Department of Pharmacology, Institute of Medical Sciences, Banaras hindu University, Varanasi-221 005, India
  • “Antimicrobial activity of Elaeocarpus sphaericus” by Singh RK, Nath G., Department of Pharmacology, Institute of Medical Sciences, Banaras Hindu University, Varanasi – 221 005, India., (Phytother Res. 1999 Aug;13(5):448-50)
  • “Celled stone of Elaeocarpus ganitrus Roxb” – by Oza. GM, Current Science, 41 (7): 269, 1972
  • “Further observations with Elaeocarpus Ganitrus on Normal and Hypodynamic Heart” – by Sarkar. P. K., Bhattacharya S.S. and Sengupta, Department of Pharmacology, Medical College Calcutta
  • “Isolation of microsatellite loci from a rainforest tree, Elaeocarpus grandis (Elaeocarpaceae), and amplification across closely related taxa” – R. C Jones, J McNally, M Rossetto (Molecular Ecology Notes, Vol. 2, Issue 2, Page 179, June 2002)
  • “More about Rudraksha” by Joyce Diamanti, 2001, The Bead Society of Greater Washington Newsletter, 18(2): 6.
  • “Notes on The Botanical Identity of Beads Found Under The Name: Rudraksha” – by Yelne, M. B., biorhythm, AYU. academy series, 44, PP. 39-44., 1995
  • “Pharmacological activity of Elaeocarpus sphaericus” by R. K. Singh, S. B. Acharya, Dr S. K. Bhattacharya, Department of Pharmacology, Institute of Medical Sciences, Banaras Hindu University, Varanasi – 221 005, India
  • “Pharmacological investigations on Elaeocarpus ganitrus.” by Bhattacharya SK, Debnath PK, Pandey VB, Sanyal AK., Planta Med. 1975 Oct;28(2):174-7.
  • “Raksha Rudraksha Chandra Marthandam” (in Nagara-Lipi, i. e. Tamil) – by Sri Mudigonda Nagalinga Sastry garu, (This book explains the greatness and power of Rudraksa and its wearing on one”s body)
  • “Regeneration status and population structure of Rudraksh (Elaeocarpus ganitrus Roxb.) in relation to cultural disturbances in tropical wet evergreen forest of Arunachal Pradesh” – Bhuyan, Putul; Khan, M. L. and Tripathi, R. S. 2002, Current Science, 83(11): 1391-1394. Department of Forestry, North-Eastern Regional Institute of Science and Technology, Nirjuli 791109, India; Department of Botany, North Eastern Hill University, Shillong 793022, India. [biological conservation, density, population structure]
  • “Rudraksa Properties and Biomedical Implications” by Subas Rai, rep. 2000, 197p.
  • “Rudraksa: Mahatwa ra Kheti Prabidhi (Dhankuta, Pakhribas Krishi Kendra)” by Chet Nath Kanel (is a fine introduction to one of the most religiously important plants in Nepal and its cultivation practices. The author claims that Rudraksa has also assumed economic, medicinal, aesthetic and environmental importance before describing its cultivation in a few hilly districts in east Nepal. The last four chapters detail the cultivation techniques, including ways to tackle diseases and post-harvest procedures before the rudraksas reach the market)
  • “Rudraksam” by N. Swarnalatha (Journal of Sukrtindra Oriental Research Institute, Vol. II, No. 1, Oct. 2000)
  • “Rudraksha – A Religious Tree and Its Economic Importance” – by Mitra, B.Das Gupta, R.Sur, Ethnobotany in India, Scientific Publishers, Jodhpur, 1992.
  • “Rudraksha – Not Just a Spiritual Symbol But Also a Medicinal Remedy” – Dennis, T. J. (1993a), Sachitra Ayurved 46, 2, 142., (on Elaeocarpus ganitrus Roxb)
  • “Rudraksha” by Dr. Vanamala Parthasarathy, Feb / Mar 1993, (Mr. Vanamala is a Reader in ancient Indian history and culture of the Anathacharya Indological Research Institute, Bombay)
  • “Scientific appraisal of rudraksha (Elaeocarpus ganitrus): chemical and pharmacological studies” – Pandey, V. B. and S. K. Bhattacharya (1985), JREIM 4, 1/2, 47-50. (on rudraksa, Elaeocarpus sphaericus (Gaertn. ) K. Schum E. ganitrus Roxb.)
  • “Significance of Rudraksha” (in Nepali language) – by Pujya Gurudev Shreesadhak Satyam (Swami Akhandananda Saraswati, Sanad Kumar Adhikari)

Rohitt Shah (Vastu Acharya – Numero Vastu Guru)

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ग्रह दोष के पूर्व संकेत
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ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा-प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं।जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभाशुभ फल हमें मिलता है ।जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है, तो वह कुछ संकेत पहले से ही देने लगता है । ऐसे ही कुछ पूर्व संकेतों का विवरण यहाँ दृष्टव्य है।

सूर्य के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 सूर्य अशुभ फल देने वाला हो, तो घर में रोशनी देने वाली वस्तुएँ नष्ट होंगी या प्रकाश का स्रोत बंद होगा । जैसे – जलते हुए बल्ब का फ्यूज होना, तांबे की वस्तु खोना ।
👉 किसी ऐसे स्थान पर स्थित रोशनदान का बन्द होना, जिससे सूर्योदय से दोपहर तक सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता हो । ऐसे रोशनदान के बन्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं । जैसे – अनजाने में उसमें कोई सामान भर देना या किसी पक्षी के घोंसला बना लेने के कारण उसका बन्द हो जाना आदि ।
👉 सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । सूर्य जन्म-कुण्डली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है । यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है । सूर्य लग्नेश हो,तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है । मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है ।
👉 किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राज्य-पक्ष से परेशानी ।
👉 यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम ।
👉 शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द ।
👉 किसी कारण से फसल का सूख जाना ।
👉 व्यक्ति के मुँह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है ।
👉 सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है ।
👉 तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है

चन्द्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 जातक की कोई चाँदी की अंगुठी या अन्य आभूषण खो जाता है या जातक मोती पहने हो, तो खो जाता है।
👉 जातक के पास एकदम सफेद तथा सुन्दर वस्त्र हो वह अचानक फट जाता है या खो जाता है या उस पर कोई गहरा धब्बा लगने से उसकी शोभा चली जाती है।
👉 व्यक्ति के घर में पानी की टंकी लीक होने लगती है या नल आदि जल स्रोत के खराब होने पर वहाँ से पानी व्यर्थ बहने लगता है । पानी का घड़ा अचानक टूट जाता है ।
👉 घर में कहीं न कहीं व्यर्थ जल एकत्रित हो जाता है तथा दुर्गन्ध देने लगता है ।

उक्त संकेतों से निम्नलिखित विषयों में अशुभ फल दे सकते हैं ।
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👉 माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है या अन्य किसी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है ।
👉 नवजात कन्या संतान को किसी प्रकार से पीड़ा हो सकती है ।
👉 मानसिक रुप से जातक बहुत परेशानी का अनुभव करता है ।
👉 किसी महिला से वाद-विवाद हो सकता है ।
👉 जल से जुड़े रोग एवं कफ रोगों से पीड़ा हो सकती है । जैसे – जलोदर, जुकाम, खाँसी, नजला, हेजा आदि ।
👉 प्रेम-प्रसंग में भावनात्मक आघात लगता है ।
👉 समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है । मन में बहुत अशान्ति होती है ।
👉 घर का पालतु पशु मर सकता है ।
👉 घर में सफेद रंग वाली खाने-पीने की वस्तुओं की कमी हो जाती है या उनका नुकसान होता है । जैसे– दूध का उफन जाना ।
👉 मानसिक रुप से असामान्य स्थिति हो जाती है

मंगल के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 भूमि का कोई भाग या सम्पत्ति का कोई भाग टूट-फूट जाता है ।
👉 घर के किसी कोने में या स्थान में आग लग जाती है ।यह छोटे स्तर पर ही होती है ।
👉 किसी लाल रंग की वस्तु या अन्य किसी प्रकार से मंगल के कारकत्त्व वाली वस्तु खो जाती है या नष्ट हो जाती है।
👉 घर के किसी भाग का या ईंट का टूट जाना ।
👉 हवन की अग्नि का अचानक बन्द हो जाना ।
👉 अग्नि जलाने के अनेक प्रयास करने पर भी अग्नि का प्रज्वलित न होना या अचानक जलती हुई अग्नि का बन्द हो जाना ।
👉 वात-जन्य विकार अकारण ही शरीर में प्रकट होने लगना ।
👉 किसी प्रकार से छोटी-मोटी दुर्घटना हो सकती है ।

बुध के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 व्यक्ति की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है अर्थात् वह अच्छे-बुरे का निर्णय करने में असमर्थ रहता है ।
👉 सूँघने की शक्ति कम हो जाती है ।
👉काम-भावना कम हो जाती है । त्वचा के संक्रमण रोग उत्पन्न होते हैं । पुस्तकें, परीक्षा ले कारण धन का अपव्यय होता है । शिक्षा में शिथिलता आती है ।

गुरु के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 अच्छे कार्य के बाद भी अपयश मिलता है ।
👉 किसी भी प्रकार का आभूषण खो जाता है ।
👉 व्यक्ति के द्वारा पूज्य व्यक्ति या धार्मिक क्रियाओं का अनजाने में ही अपमान हो जाता है या कोई धर्म ग्रन्थ नष्ट होता है ।
👉 सिर के बाल कम होने लगते हैं अर्थात् व्यक्ति गंजा होने लगता है ।
👉 दिया हुआ वचन पूरा नहीं होता है तथा असत्य बोलना पड़ता है ।

शुक्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 किसी प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे – दाद,खुजली आदि उत्पन्न होते हैं ।
👉 स्वप्नदोष, धातुक्षीणता आदि रोग प्रकट होने लगते हैं ।
👉 कामुक विचार हो जाते हैं ।
👉 किसी महिला से विवाद होता है ।
👉 हाथ या पैर का अंगुठा सुन्न या निष्क्रिय होने लगता है ।

शनि के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 दिन में नींद सताने लगती है ।
👉 अकस्मात् ही किसी अपाहिज या अत्यन्त निर्धन और गन्दे व्यक्ति से वाद-विवाद हो जाता है ।
👉 मकान का कोई हिस्सा गिर जाता है ।
👉 लोहे से चोट आदि का आघात लगता है ।
👉 पालतू काला जानवर जैसे- काला कुत्ता, काली गाय, काली भैंस, काली बकरी या काला मुर्गा आदि मर जाता है ।
👉 निम्न-स्तरीय कार्य करने वाले व्यक्ति से झगड़ा या तनाव होता है ।
👉 व्यक्ति के हाथ से तेल फैल जाता है ।
👉 व्यक्ति के दाढ़ी-मूँछ एवं बाल बड़े हो जाते हैं ।
👉 कपड़ों पर कोई गन्दा पदार्थ गिरता है या धब्बा लगता है या साफ-सुथरे कपड़े पहनने की जगह गन्दे वस्त्र पहनने की स्थिति बनती है ।
👉 अँधेरे, गन्दे एवं घुटन भरी जगह में जाने का अवसर मिलता है ।

राहु के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 मरा हुआ सर्प या छिपकली दिखाई देती है ।
👉 धुएँ में जाने या उससे गुजरने का अवसर मिलता है या व्यक्ति के पास ऐसे अनेक लोग एकत्रित हो जाते हैं, जो कि निरन्तर धूम्रपान करते हैं ।
👉 किसी नदी या पवित्र कुण्ड के समीप जाकर भी व्यक्ति स्नान नहीं करता ।
👉 पाला हुआ जानवर खो जाता है या मर जाता है ।
👉 याददाश्त कमजोर होने लगती है ।
👉 अकारण ही अनेक व्यक्ति आपके विरोध में खड़े होने लगते हैं ।
👉 हाथ के नाखुन विकृत होने लगते हैं ।
👉 मरे हुए पक्षी देखने को मिलते हैं ।
👉 बँधी हुई रस्सी टूट जाती है । मार्ग भटकने की स्थिति भी सामने आती है । व्यक्ति से कोई आवश्यक चीज खो जाती है ।

केतु के अशुभ होने के पूर्व संकेत
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👉 मुँह से अनायास ही अपशब्द निकल जाते हैं ।
👉 कोई मरणासन्न या पागल कुत्ता दिखायी देता है।
👉 घर में आकर कोई पक्षी प्राण-त्याग देता है ।
👉 अचानक अच्छी या बुरी खबरें सुनने को मिलती है ।
👉 हड्डियों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।
👉 पैर का नाखून टूटता या खराब होने लगता है ।
👉 किसी स्थान पर गिरने एवं फिसलने की स्थिति बनती है ।
👉 भ्रम होने के कारण व्यक्ति से हास्यास्पद गलतियाँ होती।

Rohitt Shah (B. Eng., CSM)

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धन की कमी से ऐसे निपटें- राशि अनुसार अपनाएं सरल उपाय :-

धन की तंगी से जूझते लोगों के लिए अनमोल और कारगर उपाय। यह उपाय 12 राशियों के अनुसार बताए गए हैं। यह उपाय अगर अपने ईष्ट का स्मरण कर भक्ति भाव से पूजन और नियम से किए जाएं तो अवश्य ही घोर धन संकट का समाधान होता है। हमारे वेद और पुराणों में भी कर्म की आवश्यकता के बारे में बताया गया है। अत: धर्म के साथ कर्म अवश्य करें। सफलता जरूर मिलेगी।

मेष के लिए उपाय
मेष- मेष राशि वाले जातकों को शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए। अधिक फायदे के लिए उसमें दो काली मिर्च डाल दें। इस उपाय से जल्दी ही आर्थिक परेशानी दूर होती है। इसके अलावा अगर धन संबंधी कोई मामला अटका है तो उसमें भी फायदा होता है।

वृषभ के लिए उपाय
वृषभ – राशि वाले जातकों को आर्थिक फायदे के लिए पीपल के 5 पत्ते लेकर उन पर पीला चंदन लगाना चाहिए। इन पत्तों को किसी नदी या बहते हुए जल में बहाने से आर्थिक संकट शर्तिया दूर होता है। जमा पूंजी में वृद्धि करने, बढ़ाने के लिए पीपल के पेड़ पर चंदन लगाए और जल चढ़ाएं।

मिथुन राशि के लिए उपाय
मिथुन – राशि वाले जातकों को व्यापार या घर में धन वृद्धि के लिए बरगद के पांच फल लाकर उसे लाल चंदन में रंग कर नए लाल वस्त्र में कुछ सिक्कों के साथ बांध कर अपने घर अथवा दुकान के अग्रभाग में लगाना चाहिए इससे कल्पनातीत धन की प्राप्ति होती है।

कर्क राशि के लिए उपाय
कर्क – राशि वाले जातकों को धन प्राप्ति के लिए संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे तेल का पंचमुखी दिया जलाना चाहिए। इसके बाद करबद्ध होकर माता लक्ष्मी से धन लाभ की प्रार्थना करें। अचानक धन की प्राप्ति होगी।

सिंह राशि के लिए उपाय
सिंह – राशि वाले जातक यदि आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं और कुछ भी सही नहीं चल रहा है तो उनके लिए एक उपाय है कि वे कौड़ियों को हल्दी के घोल में भिगो कर उन्हें अपने पूजा घर में रखें, लेकिन इससे पूर्व लक्ष्मी जी के साथ उसकी पूजा करें।

कन्या राशि वालों के लिए उपाय
कन्या-राशि वाले जातकों के लिए बहुत ही सुंदर उपाय है। आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए – दो कमलगट्टे लेकर उन्हें माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करते हुए धन प्राप्ति की कामना करें।

तुला राशि के जातकों के लिए उपाय
तुला- तुला राशि वाले जातकों के लिए धन प्राप्ति हेतु सरल उपाय है। आपको शुक्र-पुष्य नक्षत्र का इंतजार करना होगा। इस शुभ नक्षत्र में लक्ष्मी मंदिर जाकर उन्हें पांच नारियल चढ़ाएं और सभी को नारियल का प्रसाद बांटे। हां एक साबूत नारियल को अपने पास रख लें। उसे आप बहते जल में बहा दें।

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए उपाय
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले जातक का स्वामी ग्रह मंगल होता है। वे हमेशा अपने दिमाग में उलझे रहते हैं। यदि वे कर्ज की उलझन में फंसे हैं तो संध्या काल किसी भी विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में जाएं और वहां का जल एक पात्र में भर कर ले आएं, बाद में उसे पीपल के पेड़ की जड़ों में चढ़ा दें। इसके अलावा वह चाहें तो बड़ के पत्ते पर आटे का दिया जला कर उसे हनुमान जी के मंदिर में पांच मंगलवार को रखें।

धनु राशि के जातकों के लिए उपाय
धनु- धनु राशि वाले जातक यदि अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं तो गुलर के ग्यारह पत्तों को नाड़े से बांधकर किसी बरगद के वृक्ष पर बांध दें। आपकी मनोकामना पूरी होगी। इसके अलावा पीली कौड़ियां भी जेब में रख सकते हैं।

मकर राशि के जातकों के लिए उपाय
मकर- मकर राशि के जातकों के लिए आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए बहुत ही उत्तम उपाय है। उसके लिए आप शाम को आक की रूई का दीपक या एक रोटी अपने ऊपर से 21 बार उतार (वार) कर किसी तिराहे पर रख सकते हैं। इससे घर में बरकत रहने लगेगी।

कुंभ राशि के जातकों के लिए उपाय
कुंभ- कुंभ राशि के जातकों के लिए धन प्राप्त करने के बहुत ही सुंदर उपाय है। आप विष्णु-लक्ष्मी की संयुक्त रूप से प्रार्थना-पूजन करें। जहां पूजन करें वहीं रात भर जागरण करें। आपकी आर्थिक तंगी दूर होगी।

मीन राशि के जातकों के लिए उपाय
मीन- मीन राशि के जातकों के लिए धन लाभ हेतु बहुत ही सरल उपाय है। आप काली हल्दी की पूजा कर उसे अपने गल्ले में रखें और प्रतिदिन उसकी पूजा करें। यदि व्यापार में लाभ नहीं हो रहा है तो यह समस्या दूर हो जाएगी।

हमारे घनिष्ठ मित्र प• मणिकान्त पाण्डे॥

रोहित शाह

वास्तु आचार्य, मास्टर नुमेरोलॉजिस्ट, लाल किताब & फेंगशुई कंसल्टेंट

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कई लोग पैसों की समस्या से परेशान रहते हैं। इनकम तो होती है लेकिन पैसा नहीं टिकता। फालतू खर्चा भी बना रहता है। कुछ लोग मेहनत बहुत करते हैं, लेकिन उसका फायदा नहीं मिल पाता। कई बार मेहनत का फायदा किसी और को मिल जाता है। सितारों के अशुभ होने पर ऐसा होता है। ज्योतिषशास्त्र में राशि अनुसार कुछ ऐसे ही उपाय बताए गए हैं जिनसे भाग्य को प्रबल बनाया जा सकता है।
👉🏻 पढ़ें ऐसे ही खास उपाय
मेष
👉🏻 *- गुरुवार को चंदन और केसर घिसकर उससे सफेद कपड़े पर स्वस्तिक बनाएं। उसे तिजोरी या पूजा वाले स्थान पर रखें। इससे आपको किस्मत का साथ मिलेगा।*
👉🏻 *- घर के मुख्य द्वार पर सफेद कपड़े में 5 गोमती चक्र बांध दें और गुग्गल का धूप लगाएं।*
वृषभ
👉🏻 *- लक्ष्मी या किसी भी देवी मंदिर में गाय के घी का दीपक लगाएं और खीर का प्रसाद चढ़ाएं।*
👉🏻 *- रात में गाय के घी के दो दीपक जलाकर उन्हें किसी एकांत स्थान पर अपनी मनोकामना बताते हुए रख आएं।*
मिथुन
👉🏻 *- शाम को घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक लगाएं तथा उसमें दो काली गुंजा डाल दें। इससे आपकी आर्थिक परेशानी खत्म हो जाएगी और किस्मत का साथ मिलेगा।*
👉🏻 *- शुभ मुहूर्त में सफेद मदार की जड़ लेकर घर ले आएं और रोज उसकी पूजा करें।*
कर्क
👉🏻 *- पारद शिवलिंग घर में स्थापित करें और रोज पूरा करें।*
👉🏻 *- गाय की सेवा करें। बीमार गायों का इलाज करवाएं।*
सिंह
👉🏻 *- अपने घर की पूर्व दिशा में छत पर लाल रंग का त्रिकोण झंडा लगाएं।*
👉🏻 *- शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे तेल का पंचमुखी दीपक जलाएं।*
कन्या
👉🏻 *- पूर्णिमा की रात को घर के मुख्य दरवाजे पर गाय के घी का दीपक जला कर रखें। दीपक में इतना घी डालें की वो सुबह ब्रह्म मुहूर्त तक जलता रहे।*
👉🏻 *- पूर्णिमा को बरगद के पत्तों पर अनार की कलम से चंदन से श्रीराम लिखें और उनकी माला बनाकर हनुमान जी को पहनाएं।*
तुला
👉🏻 *- हर शुक्ल पक्ष में पहली तिथि से पूर्णिमा तक रोज मीठे चावल कौओं को खिलाएं।*
👉🏻 *- बरगद के पत्ते पर सिंदूर व घी से ॐ श्रीं श्रियै नम: मंत्र लिखें और इसे बहते हुए जल में छोड़ दें।*
वृश्चिक
👉🏻 *- लाल रुमाल में नारियल बांधकर अपने गल्ले अथवा तिजोरी में रखें।*
👉🏻 *- 11 मंगलवार तक हनुमान जी के वक्ष स्थल (छाती पर) चंदन से श्रीराम लिखें।*
धनु
👉🏻 *- केसर और चंदन मिलाकर लक्ष्मी और विष्णु जी के पैरों में लगाएं।*
👉🏻 *- किसी भी विष्णु मंदिर में तुलसी को पौधा दान करें।*
मकर
👉🏻 *- रुई का दीपक घर के ईशान कोण में जलाएं।*
👉🏻 *- 21 शनिवार तक पूरे घर में गोमूत्र छिड़कें और गूग्गल की धूप लगाएं।*
कुंभ
👉🏻 *- नारियल के कड़क हिस्से में घी डालकर लक्ष्मीजी को दीपक लगाएं। यह दीपक रात भर जलने दें।*
👉🏻 *- हर शनिवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पीपल को जल चढ़ाएं और घी का दीपक लगाएं।*
मीन
👉🏻 *- किसी विष्णु मंदिर में केले के पेड़ लगाएं और उनकी पूजा करें।*
👉🏻 *- पूर्णिमा को पान के पत्ते पर रोली से श्रीं लिखकर पूजा स्थान पर रखें और रोज इसकी पूजा करें।*
वास्तु समाधान:
दक्षिण दक्षिण-पश्चिम (एसएसडब्ल्यू) में पीला फूलदान रखें
दक्षिण-पूर्व क्षेत्र से काले, पीले रंगों से बचें
उत्तरी क्षेत्र में ब्लू रंग फूलदान में मनी प्लांट रखें
Rohitt Shah
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नवग्रह अरिष्ट शांति का जैनागम में शास्त्रोक्त उपाय

=========================== *Source Unknown*============================

 1……...सूर्य  ग्रह सिंह राशि का स्वामी है, यह दशम स्थान में शुभ फलदायी, आत्माकारक तथा पितृकारक

होता है। इसकी अशुभता से जातक आलसी, भयालु पितृ वैरी होता है। नौकरी व व्यवसाय में बार-बार

विघ्न आते हैं। व्यापारिक कार्यों में असफलता मिलती है, जातक राजकीय प्रकोप का भाजन बनता

है, कोर्ट कचहरी, विवाद, पितृ दोष, हृदय रोग, उदर विकार, ऋण (कर्जा) , झूठे अभियोग, प्रतिष्ठा

हानि, अल्सर, पित्त आदि होता हैं। आत्म विश्वास कम रहता है, मन पाप कार्यों में अधिक प्रवृत्त होता

है, गृहस्थ जीवन कलहपूर्ण व संतान सुख से हीन बनता है, इत्यादि सूर्य ग्रह के अरिष्ट प्रभाव होने पर उसकी शांति हेतु प्रतिदिन श्री पद्मप्रभु चालीसा, श्री नवग्रह शांति चालीसा करें एवं वर्ष में कम से कम एक

बार श्री नवग्रह शांति विधान कर जीवन का उत्थान अवश्य करें।

2…..…...चंद्रमा ग्रह  कर्क राशि का स्वामी है। यह चतुर्थ स्थान, माता, भूमि-भवन, वाहन, वाणी, सुख का

प्रमुख कारण होता है, चन्द्र की शुभता उपरोक्त विषयों की अनुकूलता प्रदान करती है और यदि

माता, भूमि-भवन, वाहन सुख का अभाव हो, वाणी में कर्कशता हो, मानसिक तनाव, फेफड़े का रोग,

चिंता, दुर्बलता, धन की कमी, हृदय का रोग, जलोदर रोग, रक्ताल्पता, रक्त प्रकोप, हाय-ब्लडप्रेशर आदि

की संभावना हो, मन में बुरे विचार आते हों, आत्महत्या की भावनायें बनती हों, विद्यार्जन, उच्च

पद प्राप्ति में निरंतर असफलता मिलती हो तो चंद्र की प्रतिकूलता का प्रभाव है, इन समस्याओं का

एकमात्र समाधान श्री चंद्रप्रभु चालीसा, श्री नवग्रह शांति चालीसा व नवग्रह शांति विधान से

हो सकता है।

3……….मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है और ग्रहों में सेनापति है, दशम स्थान का कारक है।

इसके शुभ होने पर उच्च राजयोग बनता है, जातक में नेतृत्व क्षमता आती है। इसकी प्रतिकूलता होने पर

जीवन में पदोन्नति में बाधायें आती हैं और घर में आग लगना, लड़ाई-झगड़ा, अनावश्यक कोर्ट कचहरी के

झगड़ों में उलझना, मकान में वास्तु दोष, पराक्रम का अभाव, अतिरिक्त मांसपेशियों के रोग, तीव्र ज्वर,

विषम ज्वर, बार-बार एक्सीडेंट, रक्त विकार, फोड़े- फुँसी, होठ फटना, भौतिक विषयों के प्रति तीव्र

लालसा होती है। उपरोक्त मंगल के अरिष्ट शांति हेतु श्री वासुपूज्य भगवान का चालीसा करें। श्री नवग्रह

शांति चालीसा एवं श्री नवग्रह शांति विधान करके अपना सौभाग्य जगायें।

 4………बुध ग्रह मिथुन व कन्या राशि का स्वामी है इसकी अनुकूलता होने पर जातक की वाणी में

सरस्वती का वास होता है। बुध वाणी, विद्या, बुध्दि, व्यापार और धन का कारक ग्रह माना गया है।

इसकी प्रतिकूलता होने पर व्यापार में परेशानी, धन हानि, बुध्दि विभ्रम, ब्लड कैंसर, चर्म कैंसर, कुष्ठरोग,

वाणी के कारण झगड़े आदि होते है। जिन्हें उपरोक्त अरिष्ट हो वे तथा बुध्दि जीवी, कवि, लेखक,

वास्तुविद्, प्रवचनकार, ज्योतिषी, वैद्य, डाँक्टर, साधु-संत, दार्शनिक आदि लोग बुध ग्रह की अरिष्ट

शांति हेतु एवं बुध ग्रह को प्रबल बनाने के लिए श्री शांतिनाथ भगवान का चालीसा करें। श्री नवग्रह

शांति चालीसा करें। श्री नवग्रह शांति चालीसा एवं श्री नवग्रह शांति विधान के माध्यम से जीवन

की सर्वांगीण भाग्योन्नति संभव है।

5………गुरू ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी है। यह दूसरे, पाँचवें व नववें भाव का विशेष कारक होता है।

विद्या, विवाह, धार्मिक भावना एवं अध्यात्म का प्रमुख कारक है। इसकी प्रतिकूलता होने पर उच्च

शिक्षा में व्यवधान आता है। आध्यात्मिक और नैतिक भावनाऐं कम होती हैं, विवाह संबंध में परेशानी,

संतान हानि, गले में खराबी, बुध्दि भ्रम इत्यादि गुरू ग्रह संबंधी अरिष्ट शांति हेतु भगवान श्री आदिनाथ

जी का चालीसा, श्री नवग्रह शांति चालीसा एवं श्री नवग्रह शांति विधान ही उत्तम उपाय है।

6……….शुक्र ग्रह वृषभ और तुला राशि का स्वामी है। यह संगीत, नृत्य, अभिनय, लेखन, गायन, चित्रकला

आदि का मुख्य कारक है। यदि लग्नेश शुक्र भाग्य भवन में बैठ जायें तो जातक को उच्च धर्माधिकारी

बनाता है और इसकी प्रतिकूलता तंबाखु, सिगरेट, शराब आदि व्यसनों के आधीन बनाती है। गुर्दा रोग,

जलोदर, गुप्त रोग, नजला-जुकाम, कंठ रोग, खुशी में गम आना, प्रोस्टेट कैंसर आदि शुक्र ग्रह की

प्रतिकूलता से होते हैं। उपरोक्त प्रतिकूलताओं से बचने के लिए श्री पुष्पदंत भगवान का चालीसा पाठ करें।

श्री नवग्रह शांति चालीसा व नवग्रह शांति विधान करके भाग्य को समुन्नत बनायें व कला कौशल बनें।

7……..शनि ग्रह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है, शनि अध्यात्म का मुख्य कारक है। यह अनुकूल होने पर

जातक को दीर्घायु देकर मालामाल कर देता है। अनुकूलता में धन आदि सुख छप्पर फाड़ के देता है और

प्रतिकूल होने पर कपड़े भी उतार देता है। अर्थात इसकी अनुकूलता करोड़पति और प्रतिकूलता रोडपति

बना देती है। अग्निकाण्ड, दुर्घटना, अयोग्य संतान, शरीर के निचले भाग में रोग, पैर-तलवे स्नायु संबंधी

पीड़ा, हड्डी टूटना, धीमी गति से कार्य होना, कार्यों में रुकावटें आना इत्यादि शनि के अरिष्ट

शांति हेतु श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान का चालीसा करें। श्री नवग्रह शांति चालीसा व श्री नवग्रह शांति विधान से अपना सर्वांगीण विकास करें।

8……..राहू ग्रह कन्या राशि का स्वामी माना गया है। इसकी अनुकूलता में अकस्मात धन प्राप्ति के

योग बनते हैं। लाटरी खुलना, पूर्वजों की वसीयत प्राप्त होना आदि अचानक धन लाभ राहू ग्रह

कराता है और प्रतिकूल होने पर जातक को जुआँ, सट्टा, रिश्वतखोरी, चोरी, डकैती, तस्करी आदि के

माध्यम से राजकोप का भाजन बनाता है। इसकी तीव्र प्रतिकूलता फांसी के फन्दे तक ले जाती है।

सिर पर चोट, गैस्टिक, विचारों में अस्थिरता, मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग, लम्बी बीमारी आदि राहू

की प्रतिकूलता के लक्षण हो सकते हैं। इसकी अरिष्ट शांति हेतु प्रतिदिन नेमिनाथ भगवान का चालीसा

करें। कुंडली में ग्रहण योग, पाप कर्तरी योग, कालसर्प योग होने पर प्रतिदिन श्री नवग्रह शांति चालीसा

करें एवं प्रतिमास श्री नवग्रह शांति विधान से समस्त पापों का नाश करें।

9……..केतु ग्रह मीन राशि का अधिपति माना गया है। यह जिस ग्रह के साथ बैठता है उसकी ही

प्रतिकूलता या अनुकूलता को बढ़ाता है। इसकी प्रतिकूलता से जातक के साथ बार-बार विश्वासघात

होता है। मूत्र विकार, पुत्र पर संकट, अचानक परेशानी, पुत्र द्वारा दुर्व्यवहार, कारागृह, यकृत

(लीवर) सम्बंधी रोग, हाथ-पैरों में सूजन, बावासीर आदि केतु ग्रह की प्रतिकूलता से होते हैं। इसकी

अरिष्ट शांति हेतु श्री पार्श्वनाथ भगवान का चालीसा करें और कालसर्प योग होने पर श्री नवग्रह

शांति चालीसा एवं प्रतिमास श्री नवग्रह शांति विधान से समस्त दुःखों का निदान करें।……….

रोहित शाह (Rohitt Shah)

Vastu Acharya & Master Numerologists

9049410786

7776034447

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www.MysticSolutions.com à www.MantraTantraYantras.com

External Sources:  http://www.jinvanisangrah.com/category

http://www.jinvanisangrah.com/category/%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9-chalisa-sangrah/

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http://jainpuja.com/jain-puja/navgrah-karak-mantra.aspx

https://jainsquare.wordpress.com/2012/04/04/navgrah-shanti-ke-jain-mantra/

Navgrah Jain Mantras

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NAV Graha Mantra in Hindi and English

Jyotish ke anusaar apka khaan paan

आइए जानें कि ये 9 मसाले कौन से है और ये किस प्रकार ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं व इनके पीछे छिपी वैज्ञानिकता क्या है ?

1. नमक (पिसा हुआ) सूर्य

2. लाल मिर्च (पिसी हुई) मंगल

3. हल्दी (पिसी हुई ) वृहस्पति

4. जीरा (साबुत या पिसा हुआ) राहु-केतु

5. धनिया (पिसा हुआ) बुध

6. काली मिर्च (साबुत या पाउडर) शनि

7. अमचूर (पिसा हुआ) केतु

8. गर्म मसाला (पिसा हुआ) राहु

9. मेथी (मंगल)

ध्यान दे—दीर्घायु और निरोगी रहने के लिये रसोई घर में बैठकर भोजन करना अत्यन्त लाभदायक होता है क्योंकि भोजन सामग्री पकाते समय उठने वाली सुगंध स्वयं में ऐसी दवाई है जो रामबाण का कार्य करती है। जिसे ग्रहण करने मात्र से छोटे-छोटे रोग स्वयं ही दूर भाग जाते है और यही कारण है कि स्त्रियों की आयु पुरुषों की अपेक्षा अधिक होती है। रसोई घर में भोजन करने के अनेकानेक लाभ है। जैसेः-

भोजन ताजा रूप में ग्रहण किया जाता है जो पोषक तो होता ही है शीघ्र हजम भी हो जाता है।

रसोईघर में भोजन करने से काया निरोगी रहती है।

रसोई घर में भोजन करने से आयु में वृद्ध होती है।

रसोईघर में भोजन करने से याददाश्त बढ़ाई जा सकती है।

रसोईघर में इकट्ठा बैठकर भोजन करने से पारिवारिक सदस्यों में प्यार और सौहार्द बढ़ता है व घर का वातावरण सुखी व समृद्ध होता है।

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मेष राशि—

मेष राशि में जन्मे लोग बिना सोचे-समझे कुछ भी खाने-पीने लगते हैं. इस राशि के लोगों को जब भी भूख लगती है, वो बिना कुछ समझे, जो मिल जाए वो खाना शुरू कर देते हैं. ऐसे में मेष राशि वाले मोटापे का शिकार आसानी से हो जाते हैं.

इस राशि के लोगों को कार्बोहाइड्रेट से ज्यादा प्रोटीन को अपने आहार में शामिल करना चाहिए. मेष राशि के लोगों के लिए मस्तिष्क उनका सबसे जरुरी अंग माना जाता है इसलिए उसे पोषित करने के लिए उन्हें एमिनो एसिड लेना चाहिए जो प्रोटीन से लिया जा सकता है.

मेष राशि के ज्‍यादातर लोगों को सिरदर्द और साइनस की समस्‍या रहती है। शरीर में नमक का स्‍तर कम होने के कारण यह कमजोरी और तनाव महसूस करते है।

डायट प्‍लान :— सूखे खुबानी, केला, अंजीर, ब्रोकली, बीन्स, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, पालक, गोभी, खीरा, कद्दू, बाउन राइस, दाल, स्वोर्डफ़िश और अखरोट को अपने आहार में शामिल करें!

वृषभ राशि—

इस राशि के लोग टेस्टी खाना, खाने के शौकीन होते हैं. लेकिन हेल्थी डाइट से उतना ही दूर रहते हैं. इस राशि के लोग अपनी भूख से भी ज्यादा खा लेते हैं क्योंकि इनका मन स्वादिष्ट खाने में ही अटका रहता है. पेट भर जाने पर भी वृषभ राशि वाले खाते जाते हैं और फिर अक्सर ओवरईटिंग की वजह से परेशान होते हैं.

इस राशि के लोगों को नीचे बैठ कर भोजन करना चाहिए, साथ ही सब्जियों और सलाद को अपनी डाइट में अधिक शामिल करना चाहिए. यही नहीं वृषभ राशि वालों को मीठे खाद्य पदार्थों और रिच फूड से बचना चाहिए अन्यथा डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, मोटापा और अन्य इनसे जुड़ी बीमारियां होने का खतरा हो सकता है.

वृषभ राशि के लोग स्‍ट्रेस ज्‍यादा लेते हैं, जिसका बुरा असर उनके शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है।

डायट प्‍लान :— नट्स, अंडे, समुद्री भोजन, पालक, हरी सलाद, क्रेनबेरीज और बींस अधिक मात्रा में खाएं।

मिथुन राशि—

इस राशि के लोग एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटी पर अधिक ध्यान देते हैं और उसी के अनुसार अपना डाइट प्लान बनाते हैं. इस राशि के लोगों का शरीर जितनी जल्दी मोटा होता है उतनी ही जल्दी पतला भी हो जाता है लेकिन यदि फिजिकल एक्टिविटी बनी रहें तो! यह राशि मेहतन करने वाले लोगों की राशि है इसलिए इन लोगों में फिट रहने की आदत होती है.

मिथुन राशि वाले लोगों को फ़ास्ट-फूड से बचना चाहिए क्योंकि इस राशि के जातकों का नर्वस सिस्टम कमज़ोर होता है. अक्सर ये लोग भाग कर ही खाते-पीते हैं जिसकी वजह से भी इनका पाचन तंत्र गड़बड़ी में रहता है.

इस राशि के लोग छोटी-छोटी बातों पर बहुत चिंता करते हैं और हमेशा तनाव में नजर आते हैं। इन्‍हें कैफीन और बहुत ज्‍यादा शराब से दूर रहना चाहिए।

डायट प्‍लान :— ऐसे लोगों को अपने आहार में शतावरी, अंगूर, बादाम, शैलफिश, सेब, संतरा, आड़ू, प्लम, दूध, छाछ और पनीर अधिक मात्रा में शामिल करना चाहिए।

कर्क राशि—

इस राशि के लोग मूडी होते हैं और खाने-पीने में भी अपने मूड के हिसाब से डाइट लेते हैं. कर्क राशि के लोग आरामदायक तरीके से खाते हैं और ख़ुशी में होने पर या दुखी होने पर अपने आहार को ज्यादा या कम कर देते हैं. कई बार इस राशि के लोग जरूरत से ज्यादा और कई बार बिलकुल नहीं खाते हैं | इस राशि के लोगों को बचपन से ही अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए. चूंकि इस राशि के लोगों को स्तन और पेट से सम्बंधित बीमारियां होने की संभावनाएं होती हैं इसलिए इन्हें अपने खान-पान का खास ख्याल रखना चाहिए | इस राशि के लोग ओवरईटिंग का शिकार होते हैं। विशेष रूप से जब यह किसी बात को लेकर परेशान होते हैं तो ये अपनी भूख से कुछ ज्‍यादा ही खाते हैं।

डायट प्‍लान :— अंगूर, संतरा, तरबूज, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, सलाद पत्ता, अजवायन, लेमनग्रास, मछली और शैलफिश से फायदा मिलता है।

सिंह राशि—

इस राशि के लोगों को अपने आपको खुश रखने के लिए, आहार का सहारा लेना चाहिए. आपके द्वारा लिया गया आहार आपके मन, सोच और व्यवहार को आपके व्यक्तित्व के अनुसार बदलने में सहायक होता है. आप अपने सकारात्मक आचरण को बनाए रखने के लिए सब्जियों का सहारा ले सकते हैं. ऐसे लोगों को आप अवॉयड करें जो आपके प्रयासों की आलोचना करते हैं | इस राशि के जातकों को अपने आहार से कार्बोहाइड्रेट को दूर रखना चाहिए और सब्जियों को ज्यादा स्थान देना चाहिए | ये लोग बहुत ही जल्‍दी और आसानी से मोटापे का शिकार हो जाते हैं। इसलिए लो-फैट लेवल आपको स्‍वस्‍थ रखने के लिए आवश्‍यक है।

डायट प्‍लान :— सिंह राशि के लोगों को बादाम, होल वीट, खजूर, अखरोट, किशमिश, चुकंदर, नारियल, नींबू, आड़ू, नाशपाती, अंजीर, मीट, समुद्री भोजन और शतावरी को अपने आहार में शामिल करना चाहिए।

कन्या राशि—

इस राशि के लोगों का हर रिजल्ट तुरंत चाहिए होता है, जल्दी खाना और जल्दी ही उसका असर हो जाना! ऐसे लोग मोटे हो जाएं तो पतले होने के लिए कई डाइट प्लान अपनाते हैं और चाहते हैं कि उसका असर जल्द हो जाए और जब ऐसा नही होता है तो, वो लोग फिर दूसरा प्लान बनाने लगते हैं. बड़े ही चंचल मन के होते हैं कन्या राशि के जातक | ऐसे लोगों को एलर्जी ज्यादा होती है और उनसे बचने के लिए इन्हें जैविक आहार लेने चाहिए. कन्या राशि के जातकों को त्वचा से सम्बंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसलिए इन्हें खाने पीने का खास ख्याल रखना चाहिए | कन्‍या राशि के लोग बहुत जल्‍दी चिंताग्रस्‍त हो जाते हैं, इससे उनका पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। साथ ही इस राशि के जातकों को अपनी परतदार, थकान भरी और ड्राई स्किन का ध्‍यान रखना चाहिए।

डायट प्‍लान :— ओट्स, होल वीट अनाज ब्रेड, तरबूज, पपीता, संतरा, केला, पनीर और अंडे को अपने आहार में शामिल करें।

तुला राशि—

इस राशि के लोग खाने में बड़े चूज़ी किस्म के होते हैं. ये लोग आसानी से अपने आहार को बदलते रहते हैं या ये कहें की इन्हें नये-नये व्यंजन खाना बेहद पसंद होता है लेकिन ये पोषण को अपने खाने से दूर ही रखते हैं.

इस राशि के लोगों को गुर्दे और डायबिटीज जैसी बीमारियां होती है इसलिए इन्हें अपने आहार में पोटेशियम से भरपूर आहार लेना चाहिए, जैसे- केला, पत्तेदार सब्जियां, मछली और दही अधिक खाएं | इस राशि के लोगों को लिवर से जुड़ी समस्‍याएं होती है। इसलिए इन्‍हें बहुत ज्‍यादा अल्‍कोहल लेने और प्रोसेस्‍ड फूड से बचना चाहिए।

डायट प्‍लान :— तुला राशि वालों को अपनी डायट में स्ट्रॉबेरी, चुकंदर, कोर्न, गाजर, सेब, किशमिश, अंडा, समुद्री भोजन, कम वसा वाले पनीर और दही को शामिल करना चाहिए।

वृश्चिक राशि—

इस राशि के लोग मजबूत इच्छा शक्ति के मालिक होते हैं. ये लोग अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने में माहिर होते है जिसके कारण ये कुछ भी सोच लें उसे पूरा करके छोड़ते हैं. ऐसे लोग अपनी तकलीफों को छिपा कर दूसरों को खुश करने की कोशिश करते हैं और इसी के चलते कई बार दूसरों के द्वारा परोसा गया भोजन खा लेते हैं.

ऐसे लोगों को आंत और कब्ज की शिकायत होने की संभावनाएं रहती हैं इसलिए इस राशि के जातकों को हाई फाइबर, सलाद और हरी सब्जियों को शामिल करना चाहिए | इस राशि के लोग बहुत ज्‍यादा भावनात्‍मक होने के कारण अक्‍सर भावनात्‍मक तनाव से ग्रस्‍त रहते है। इन्‍हे संक्रमण का खतरा भी ज्‍यादा रहता है।

डायट प्‍लान :— चीज, दूध, दही, अखरोट, बादाम, अनानास, कमल ककड़ी, खट्टे फल और सी -फूड ज्‍यादा खायें।

धनु राशि—

धनु राशि के लोग अपने लक्ष्य को पाने के लिए जम के मेहनत करते हैं और जल्द ही उसका परिणाम चाहते हैं. ऐसे लोग जिम आदि ज्वाइन कर अपनी सेहत बनाने के लिए खून पसीना बहाते हैं. इस राशि के जातकों का लीवर कमज़ोर होता है इसलिए इन्हें अधिक वसा और फैट वाले आहार नहीं लेने चाहिए.

ऐसे लोगों को क्रीम, नमक और चीनी का सेवन नियंत्रण में रह कर करना चाहिए और लीवर को स्वस्थ रखने के लिए पानी अधिक पीना चाहिए | इस राशि के लोगों का वजन जल्‍दी बढ़ने लगता है, विशेष तौर पर इनके जांघों और कूल्‍हों पर बहुत जल्‍दी फैट बढ़ने लगता है। इसलिए इन्‍हें शराब और फैट वाले आहार का सेवन कम करना चाहिए।

डायट प्‍लान :— संतरे, प्लम, स्ट्रॉबेरी, अंजीर, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, चेरी, शतावरी, हरी मिर्च, आलू और टमाटर, ओट्स, अंडे, होल वीट, स्किम्ड मिल्‍क, मछली और दही का सेवन करें।

मकर राशि—

मकर राशि के लोग अपनी मंजिल को पाने के लिए आतुर रहते हैं. ऐसे लोग रातोंरात सफलता पाना चाहते हैं. अपनी बातों से आसानी से लोगों को लुभाने वाले मकर राशि के जातक अदरक खाना और पीना अधिक पसंद करते हैं. एल्कोहल में बीयर, वो भी अदरक बीयर, इन्हें बेहद पसंद होती है | ये लोग एरोबिक्स और वजन कंट्रोल करने के लिए डिसिप्लिन रहते हैं. इस राशि के लोगों को कैल्शियम की कमी हो सकती है इसलिए इन्हें दूध, अंडा आदि कैल्शियम से भरपूर डाइट लेनी चाहिए | मकर राशि के ज्‍यादातर लोगों को कम उम्र में ही कमजोर हड्डियों और जोड़ो के दर्द की समस्‍या हो सकती है। इसलिए इनके आहार में कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ होने चाहिए।

डायट प्‍लान : —इस राशि के जातकों को ब्रोकली, अंजीर, संतरा, नींबू, गोभी, मटर, आलू और पालक, भूरे रंग के चावल, ओट्स, बादाम, अखरोट, अंडे, मछली, पनीर, छाछ और दही लेना चाहिए।

कुंभ राशि—

असामान्य तरीकों से लोगों को प्रभावित करने में माहिर होते हिं कुंभ राशि वाले. यह मूल आहार को अपनी डाइट का मुख्य हिस्सा मानते है. यह लोग बोर होने पर अपना खाना भी छोड़ देते हैं. हर बार कुछ नया अपनाना और करना ही इनका मूड होता है, जिसे यह लोग आसानी से अडॉप्ट कर लेते हैं और छोड़ भी देते हैं.

कुंभ राशि वाले शराब की गिरफ्त में आसानी से आ जाते हैं और उसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है इससे बचने के लिए इन्हें अदरक बीयर लेनी चाहिए. कुंभ राशि के ज्‍यादातर लोगों में हाई बीपी की समस्‍या देखी जाती है।

डायट प्‍लान : — आड़ू, नाशपाती, अंजीर, नींबू, खजूर, अनार, गोभी, स्ट्रॉबेरी, कॉर्न, अजवाइन, मिर्च, मूली, टमाटर, दाल, ब्राउन राइस, बादाम, चिकन, वील, क्लेम, झींगा और ट्यूना शामिल करें।

मीन राशि—

इन्हें परफेक्शन चाहिए होता है हर चीज़ में, फिर वो रोज की डाइट ही क्यों न हो. इसके लिए यह भोजन को अधिक सजा कर खाना और पेश करना पसंद करते हैं. लेकिन अक्सर ओवर-इटिंग की वजह से यह परेशान हो जाते हैं | मीन राशि वालों को डांस, योगा और मैडिटेशन करना चाहिए ताकि यह अपने भावों को ठीक से व्यक्त कर सकें. इन लोगों को अधिक पानी पीने या तरल पदार्थों को अधिक लेना चाहिए. इन्हें पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्या होने की सम्भवना होती हैं इसलिए इससे बचने के लिए तरल चीज़े अधिक लेनी चाहिए. इस रा‍शि से संबंधित लोग जुकाम, फ्लू और संक्रमण से ग्रस्त होते हैं।

डायट प्‍लान :– मीन राशि वालों को अपने आहार में चिकन, कस्तूरी, बींस, होल वीट, संतरे, चुकंदर, सलाद, प्याज, सेब को शामिल करना चाहिए।

रविवार को चना, सोमवार को खीर अथवा दूध, मंगलवार को चूरमा तथा हलवा, बुधवार को हरी सब्जी, गुरुवार को चने की दाल अथवा बेसन का प्रयोग, शुक्रवार को मीठा दही और शनिवार को उड़द का सेवन करने से सभी ग्रह प्रसन्न रहते हैं। तो अब आप समझ गए ना की की आपको अपनी राशि के अनुसार क्या खाना और पीना हैं तो बस अपना डाइट चार्ट बनाकर खाएं-पिएं और स्वस्थ रहें!!!

Courtesy Unknown

Rohitt Shah

Mystic Solutions

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